Aurangabad News : (ओम प्रकाश) बिहार की राजनीति से जुड़े चर्चित ओबरा विधानसभा चुनाव 2010 मामले में 16 साल बाद बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. ओबरा के पूर्व विधायक सोम प्रकाश सिंह को अब बिहार विधानसभा का वैध पूर्व सदस्य नहीं माना जाएगा. इसके साथ ही उनकी पेंशन और पूर्व विधायक के रूप में मिलने वाली सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई हैं.
विस सचिवालय से निर्देश जारी
इस संबंध में बिहार विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी की. बिहार विधानसभा के अवर सचिव जयप्रकाश दुबे द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय में लंबित सिविल अपील संख्या 5562/2014 (सोम प्रकाश सिंह बनाम प्रमोद सिंह चंद्रवंशी) में 28 जनवरी 2026 को दिए गए अंतिम निर्णय के बाद बिहार के महाधिवक्ता से परामर्श लिया गया.
अब नहीं माना जाएगा पूर्व विस सदस्य
महाधिवक्ता की राय में स्पष्ट किया गया कि सोम प्रकाश सिंह को 15वीं बिहार विधानसभा का सदस्य नहीं माना जा सकता. इसी आधार पर उन्हें पूर्व विधायक के रूप में मिलने वाली पेंशन और अन्य सभी लाभ तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश जारी किया गया.
2010 के चुनाव से शुरू हुआ था विवाद
विधानसभा सचिवालय की प्रभारी सचिव पूनम सिन्हा द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, वर्ष 2010 में ओबरा विधानसभा क्षेत्र संख्या-220 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए सोम प्रकाश सिंह के निर्वाचन को जदयू प्रत्याशी प्रमोद सिंह चंद्रवंशी ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. पटना हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2014 को सोम प्रकाश सिंह का निर्वाचन रद्द कर दिया था. इसके बाद 21 मई 2014 को उनकी सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी की गई थी.
हालांकि, बाद में सोम प्रकाश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की. सुप्रीम कोर्ट ने 18 सितंबर 2015 को अंतरिम आदेश जारी कर पूर्व अधिसूचना पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद 26 दिसंबर 2015 को उनकी सदस्यता बहाल कर दी गई थी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी 2026 को अंतिम सुनवाई में उनकी अपील खारिज कर दी, जिससे पटना हाईकोर्ट का फैसला प्रभावी हो गया और उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त मानी गई.
पूर्व थानाध्यक्ष से विधायक तक का सफर
गौरतलब है कि सोम प्रकाश सिंह पूर्व में ओबरा थाने के थानाध्यक्ष भी रह चुके हैं. वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए एनडीए लहर के बावजूद जदयू प्रत्याशी प्रमोद सिंह चंद्रवंशी को बेहद कम मतों से हराया था. तभी से यह मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बना हुआ था.
सत्य और न्याय की जीत : प्रमोद सिंह चंद्रवंशी
इधर, वर्तमान में भाजपा अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रमोद सिंह चंद्रवंशी ने इस फैसले को सत्य, संविधान और लोकतंत्र की जीत बताया है. उन्होंने कहा कि वर्षों के संघर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार सत्य की विजय हुई है. उन्होंने मांग की कि 15वीं विधानसभा के कार्यकाल के दौरान उन्हें वैधानिक रूप से निर्वाचित सदस्य घोषित किया जाए तथा पिछले 16 वर्षों से लंबित वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं का भुगतान किया जाए.
प्रमोद सिंह चंद्रवंशी ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.
टिप्पणी से किया इनकार
वहीं, पूर्व विधायक सोम प्रकाश सिंह ने फिलहाल पूरे मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. उन्होंने फोन पर कहा कि वे 24 घंटे बाद ही इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे.
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