गर्भावस्था के 24 सप्ताह के बाद और शिशु के जन्म से पहले यदि योनि से रक्तस्राव होता है, तो इसे चिकित्सा विज्ञान में एंटेपार्टम हैमरेज (एपीएच) या प्रसवपूर्व रक्तस्राव कहा जाता है. यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है. समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए खतरा बन सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना सबसे जरूरी है.
तीन से पांच प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में होती है समस्या
सदर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान होने वाले किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. एंटेपार्टम हैमरेज लगभग तीन से पांच प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में देखा जाता है. इसकी गंभीरता रक्तस्राव की मात्रा और कारण पर निर्भर करती है. कई मामलों में समय पर इलाज मिलने से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.
कब संभव है सामान्य प्रसव
डॉ. अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि एपीएच होने पर सामान्य प्रसव संभव होगा या नहीं, यह पूरी तरह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है. यदि रक्तस्राव हल्का हो, बंद हो चुका हो, अल्ट्रासाउंड में प्लेसेंटा सामान्य स्थिति में हो और मां व शिशु दोनों स्वस्थ हों, तो चिकित्सकीय निगरानी में सामान्य प्रसव कराया जा सकता है. वहीं यदि प्लेसेंटा गर्भाशय के मुंह को ढक रहा हो, अत्यधिक रक्तस्राव हो या गर्भस्थ शिशु संकट में हो, तो मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए सिजेरियन ऑपरेशन सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है.
रक्तस्राव होने पर तुरंत करें डॉक्टर से संपर्क
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कंचन कुमारी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान रक्तस्राव होने पर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें. डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूर्ण आराम करें. भारी सामान उठाने, अधिक शारीरिक श्रम करने और सीढ़ियां चढ़ने से बचें. जब तक डॉक्टर अनुमति न दें, शारीरिक संबंध भी नहीं बनाना चाहिए. साथ ही गर्भस्थ शिशु की गतिविधियों पर लगातार नजर रखें. यदि बच्चे की हलचल कम हो जाए या रक्तस्राव बढ़ने लगे, तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए.
नियमित जांच और सतर्कता से कम हो सकता है खतरा
चिकित्सकों के अनुसार नियमित प्रसवपूर्व जांच (एएनसी), समय पर अल्ट्रासाउंड और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से एपीएच जैसी गंभीर स्थिति के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को किसी भी असामान्य लक्षण को छिपाने या घरेलू उपचार करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए. डॉ. अभिषेक कुमार सिंह ने कहा कि मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई कदम नहीं उठाना चाहिए. नियमित दवा और उपचार जारी रखना जरूरी है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है.
