आफत. किसानों को 12 लाख से भी अधिक का नुकसान
कुटुंबा : उन्नत खेती के बिना राज्य व राष्ट्र का विकास संभव नहीं है. सरकार इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करने व किसान के विकास के लिए कृषि रोड मैप तैयार करायी है. इसके तहत किसानों के हित में कई कल्याणकारी योजनाएं चलायी गयी हैं. किसान भी अधिक उत्पादन व उपज के ऊंचा मूल्य के ख्याल से नवीनतम तकनीक व उत्तम बीज का प्रयोग कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में उन्हें काफी लाभ मिल रहा है, तो कभी फसल से हाथ भी धोना पड़ रहा है. बारुण प्रखंड के प्रीतमपुर के किसानों ने अधिक उत्पादन के उद्देश्य से महक प्रजाति के सुगंधित धान की फसल लगायी. उत्पादन तो एक ग्राम भी नहीं हुआ,
पर खेत में लगा डंठल जी का जंजाल बना हुआ है. उक्त गांव में विनय पांडेय, आलोक पांडेय, राजेश पांडेय, सुधीर पांडेय आदि ने 30 एकड़ जमीन में इस वेराइटी की खेती की. उन्होंने बताया कि परंपरागत विधि से खेती करने में तकरीबन तीन लाख रुपया खर्च हुए हैं. फसल की उपज से लगभग 10 लाख की आमदनी होने की उम्मीद थी. धान रोपनी के बाद फसल का विकास देख कर किसान भी सराहना कर रहे थे. पर बाल निकलने के समय तीन से चार दिन में सारी फसल झूलस कर काली हो गयी. एक भी बाली सुरक्षित नहीं रह गयी. ऐसी स्थिति में किसानों के आशा पर पानी फिर गया. फिलहाल, उसे कटनी करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं. धान का डंठल बिल्कुल काला पड़ गया है. किसान फसल में आग लगाने या हार्वेस्टर से खेत को साफ कराने के लिए सोच रहे हैं.
