कमलकांत की नहीं थी किसी से दुश्मनी
औरंगाबाद कार्यालय : कमलकांत चौबे एक निजी विद्यालय के शिक्षक हैं. बताया जाता है कि स्वभाव से भी यह व्यक्ति काफी सरल थे और जिस व्यक्ति ने इनकी हत्या की उससे इनकी न कोई दुश्मनी थी न तो कोई झगड़ा हुआ था. झगड़ा हुआ भी था तो कमलकांत के भाई नितेशकांत से. इसमें सबसे बड़ी गौर करने की बात यह है कि कमलकांत का घर शाहपुर में ही रामलखन सिंह यादव महाविद्यालय के समीप है. और जिस व्यक्ति ने इनकी हत्या की वह भी शाहपुर मुहल्ले के ही देवी स्थान के समीप का रहने वाला है.
दोनों का आवास 100 गज की दूरी पर है. कमलकांत के भाई नितेशकांत से अगर अजीत का विवाद हुआ था तो शाहपुर में हुआ था. धर्मशाला मोड़ तक यह मामला कैसे पहुंचा.
हत्या के कारणों को लेकर संशय : धर्मशाला मोड़ के समीप शुक्रवार की रात 10 बजे कमलकांत नामक युवक की हत्या के कारणों को लेकर पुलिस अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है. पुलिस केवल मृतक के परिजनों द्वारा दिये गये लिखित बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई कर रही है. अभी तक न तो घटना की छानबीन की गयी है न घटनास्थल पर कोई बड़े पदाधिकारी आया. न घटनास्थल पर पूछताछ की गयी, न आसपास के लोगों से पूछताछ की गयी है. इससे पता चलता है कि पुलिस इस घटना के प्रति कितनी गंभीर है.
दोबारा लौट कर आया था आरोपित : प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि कमलकांत से कहासुनी के बाद अजीत दोबारा वापस लौटने की बात कह कर कहीं चला गया. वह थोड़ी देर बाद अपने चार पहिया वाहन से दोबारा वहां लौटा. तब कमलकांत और नितेशकांत दोनों पहले से वहां मौजूद थे. अजीत ने गड़ासे से ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिये. इसका प्राथमिकी में भी उल्लेख किया गया है.
लेकिन, सवाल यह है कि जब अजीत सिंह, कमलकांत को धमकाते हुए घर गये थे तो कमलकांत और उनके भाई धर्मशाला चौक पर क्यों खड़े रह गये. क्या वे अजीत सिंह को घर से आने का इंतजार कर रहे थे. इन्हें कम से कम 20 मिनट का वक्त तो जरूर मिला था. क्योंकि, धर्मशाला चौक से अजीत सिंह का घर शाहपुर एक किलोमीटर है. रास्ता भी शाहपुर रोड का अच्छा नहीं है. आने-जाने में काफी समय लगा होगा. इतने समय में ये लोग आराम से अपने घर जा सकते थे, लेकिन धर्मशाला मोड़ पर ही क्यों रुके रहे.
यमुना नगर में पुलिस के सामने आरोपित की गाड़ी को क्षतिग्रस्त करते लोग.
छोटे भाई से हुआ था अजीत का विवाद
लोगों की मानें तो कमलकांत से अजीत सिंह का कोई विवाद नहीं हुआ था. विवाद हुआ था कमलकांत के भाई नितेशकांत से. कमलकांत तो यह सुन कर पहुंचे थे कि, उनके छोटे भाई नितेश कांत और अजीत सिंह में विवाद हुआ है. कुछ लोग यह भी बताते हैं कि कमलकांत एक सिनेमा हॉल में फिल्म देख रहे थे, जहां उनको मामले की जानकारी मिली. जबकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि घर पर उन्हें जानकारी भाई के साथ हुए विवाद की जानकारी मिली. विवाद की जानकारी पाकर वह धर्मशाला चौक आये थे, लेकिन यहां पर अजीत सिंह के साथ कमलकांत की कहासुनी हो गई. इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को बता देने की धमकी दी.
धनाड़ी गांव से बरामद हुई हत्या के मुख्य आरोपित अजीत की सफारी
शुक्रवार की रात हत्या की घटना के बाद पुलिस अजीत की गिरफ्तारी के लिये कई जगहों पर छापेमारी की. जिस सफारी वाहन से घटना का अंजाम देकर वह भागा था,उस वाहन को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के धनाड़ी गांव से पुलिस ने बरामद किया. एसडीपीओ पीएन साहू ने बताया कि घटना का अंजाम देकर अजीत सिंह अपना सफारी वाहन को धनाड़ी गांव में छुपा कर भाग निकला था. शनिवार की सुबह उसके वाहन को बरामद कर लिया गया है.
नवपदस्थापित पुलिस अधीक्षक के लिए चुनौती है यह घटना : नवपदस्थापित एसपी सत्यप्रकाश के योगदान के बाद इस जिले में शिक्षक कमलकांत की हत्या एक बड़ी घटना है. अपराधियों द्वारा कमलकांत की सर कलम कर हत्या किये जाने के मामले में एसपी क्या रूख अपनाते हैं, इस पर पूरे शहर की नजर होगी.
क्यों अजीत का इंतजार करते रहे कमलकांत
लोगों के बीच चल रही चर्चा से जो बात सामने आ रही है, उसके मुताबिक नितेशकांत के कुछ दोस्तों ने ही उसे और कमलकांत काे यह कहते हुए रोक कर रखा कि देखते हैं क्या बिगाड़ लेगा. लेकिन, अजीत जब तेज हथियार के साथ वापस लौटा और अंधाधुंध कमलकांत पर वार शुरू किये, तो नितेशकांत और दोस्त उसे रोकने का साहस नहीं कर पाये. धर्मशाला चौक पर हत्या कर अपराधी दक्षिण दिशा की तरफ भाग निकला था. इसकी जानकारी मिली तो जिले की आधी पुलिस दक्षिण दिशा की तरफ निकल पड़ी.
अपराधियों का अड्डा बना चौक
धर्मशाला चौक शांति का संदेश देने वाली जगह के रूप में जाना जाता है. लोग यहां का माहौल देख कर सुकून महसूस करते हैं, लेकिन कुछ दिनों से यह चौक पर अपराधियों की निगाहों में गड़ गया है. बताया जा रहा है कि इन दिनों यहां अपराधी किस्म के लोगों का जमावड़ा लगा रहता है.
