बुद्धिजीवियों और मीिडया के हस्तक्षेप के बाद मिला एंबुलेंस
औरंगाबाद नगर : सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित करने के लिये सरकार द्वारा तो चयनित कर लिया गया है. लेकिन अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था में सुधार होने के बजाय दिन-प्रतिदिन खराब होते चली जा रही है. कुछ इसी तरह का नजारा बुधवार की सुबह देखने को मिला. एक मासूम को लेकर माता-पिता एंबुलेंस के लिये सदर अस्पताल में घंटों देर तक चक्कर लगाते रहे. कुटुंबा प्रखंड के हनेया गांव निवासी बालकेश मेहता की दो वर्षीय पोती ममता कुमारी बीमार थी, जिसे इलाज कराने के लिये उसके माता मानमति देवी व पिता संतोष मेहता सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे.
चिकित्सकों ने तो इलाज तो किया, लेकिन ममता की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उसे बाहर रेफर कर दिया. रेफर किये जाने के बाद माता-पिता बच्ची को गोद में लेकर इधर-उधर एंबुलेंस को खोजने लगे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा एंबुलेंस की कोई व्यवस्था नहीं की गयी. इसके बाद दंपती अस्पताल परिसर में ही बैठकर रोने चिल्लाने लगे और अपना दुखड़ा सुनाने लगे. बुद्धिजीवियों व मीडियाकर्मियों की पहल पर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें 108 एंबुलेंस उपलब्ध करायी. अस्पताल प्रबंधक हेमंत राजन ने बताया कि अस्पताल में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं रहने के कारण परेशानी हुई.
