स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख व डीएम के आदेश के बाद भी अड़े थे सीएस
िनदेशक प्रमुख ने 12 िसतंबर को ही दिया था स्थानांतरण पर रोक का आदेश
औरंगाबाद नगर : जिले में वर्षो से कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को बड़े पैमाने पर जून महीने में किये गये स्थानांतरण मामले की जांच करने के लिये मगध प्रक्षेत्र के आरडीडी डाॅ विनय कुमार यादव सीएस कार्यालय पहुंचे और करीब दो घंटे तक पूरे प्रकरण की जांच की. हालांकि, जांच के क्रम में आरडीडी ने क्या खामियां पायी, उसे नहीं बताया और यह कहते हुए पाला झाड़ लिया कि वरीय पदाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जायेगी. इधर, सिविल सर्जन डाॅ आरपी सिंह ने स्वास्थ्य कर्मियों के स्थानांतरण प्रक्रिया को निदेशक प्रमुख प्रशासन व डीएम के आदेश पर स्थगित कर दिया है.
सिविल सर्जन ने अपने जारी किये गये पत्र में कहा है कि निदेशक प्रमुख प्रशासन द्वारा दिये गये आदेश के आलोक में व जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट आने तक स्थानांतरण प्रक्रिया को स्थगित किया जाता है और जो जिस स्थान पर पदस्थापित थे, उसी स्थान पर बने रहेंगे. आरडीडी ने एक-एक कर स्वास्थ्य कर्मियों से पूछताछ की. इस दौरान कुछ स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि जिन लोगाें ने पैसा दिया, उन लोगों को मनचाही जगह पर पोस्टिंग दी गयी. वहीं, जो लोग पैसा नहीं दिये, उन लोगों को काफी दूर भेज दिया गया. जन चिकित्सा कर्मचारी संघ के जिलामंत्री वशिष्ठ सिंह ने कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया में सिविल सर्जन द्वारा मनमानी की गयी है.
स्थानातंरण के दूसरे दिन ही स्वास्थ्य कर्मियों ने इसका विरोध किया था, लेकिन सिविल द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी थी. फिर आंदोलन करना पड़ा. वरीय पदाधिकारी से शिकायत की गयी, तब जाकर स्थानांतरण प्रक्रिया पर रोक लगाई गई. बताते चलें कि स्थानांतरण के एक सप्ताह बाद डीएम ने स्थानातंरण प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी. साथ ही पूरे मामले की जांच करने के लिये टीम गठित की थी. फिर भी, सिविल सर्जन द्वारा आदेश को स्थगित नहीं किया गया था. इसके बाद निदेशक प्रमुख प्रशासन ने 12 सितंबर से ही स्थानांतरण प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी, फिर भी सीएस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी. जब मामला तूल पकड़ता चला गया, तो 16 सितंबर को सिविल सर्जन ने आदेश को स्थगित किया. इसमें देखना यह होगा कि अब आगे क्या होता है और जांच में कौन दोषी पाये जाते हैं.
