दाउदनगर : दाउदनगर का ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण त्योहार जिउतिया पर्व की शुरुआत आज से हो रही है. अनंत चतुर्दशी के दूसरे दिन से दाउदनगर में जिउतिया पर्व मनाने की परंपरा रही है, जो पारण के साथ समाप्त होता है. शुक्रवार की शाम को दाउदनगर शहर स्थित भगवान जिमुतवाहन के चार मंदिरों में से तीन में ओखली रख दी जाएगी, जबकि एक मंदिर में दूसरे दिन ओखली रखी जाएगी. बिहार में शराब बंदी लागू होने के बाद पहली बार इस त्योहार को पूर्ण नशामुक्त वातावरण में मनाया जाएगा. 16 सितंबर से 24 सितंबर तक चलने वाले इस जिउतिया मेले की तैयारी पूरी हो चुकी है. जिमुतवाहन मंदिरों का रंगरोगन पूरा हो चुका है. भादो मास की पूर्णिमा से ओखली रखे जाने के बाद यह पर्व आरंभ होता है. 9 दिनों तक चलने वाले इस मेले में मंदिरों के पास सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ अनोखा एवं अदभुत कला का प्रदर्शन भी किया जाता है
इस कला को देखने के लिए राज्य ही नहीं, बल्कि अन्य प्रदेशों से भी लोग यहां आते हैं. पूर्व वार्ड पार्षद सह पत्रकार जगन्नाथ कांस्यकार ने बताया कि कसेरा टोली स्थित जिउतिया चौक पर यह मेला विक्रम संवत 1917 से ही आरंभ है. नहाय-खाय से लेकर पारण तक यह लोकोत्सव चरम पर रहेगा. स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा नौ दिनों तक अपनी कला का प्रदर्शन किया जाएगा. पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध के अंत होने के बाद से यह पर्व पूरे देश में हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा यह पर्व मनाया जाता रहा है. माताएं अष्टमी को उपवास रखकर नवमीं को पारण करती हैं. इस दौरान घी के दीपक के साथ अपनी सामर्थ्य के अनुसार चांदी एवं सोने के जिउतिया भी पहना जाता है. पुत्र के दीर्घायु कामना के लिए यह व्रत ओड़िसा, पश्चिम बंगाल एवं अन्य प्रदेशों से आये महिलाएं भी करती हैं.
मंदिरों के पास पुत्र कामना की मनौतियां भी मांगी जाती हैं. ‘जिउतिया’ डाक्यूमेंट्री फिल्म के निदेशक धर्मवीर भारती ने बताया कि इस पर एक घंटे की फिल्म बनायी गयी है, इसकी रिलीज जिउतिया पर्व पर कला एवं संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम द्वारा पुराना शहर चौक स्थित ज्ञानदीप समिति के तत्वावधान में करायी जायेगी. शहर में अभिनय कला को प्रोत्साहन देने के लिए पुराना शहर कसेरा टोली व पटवा टोली इमलीतल, बम रोड में नकल अभिनय प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा.
