औरंगाबाद (कोर्ट) : वर्ष 2010 में दाउदनगर में पदस्थापित भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर) को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत विलंब से सूचना देने मामले में राज्य सूचना आयोग द्वारा 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है.
आयोग द्वारा दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें अपने वेतन से पांच हजार रुपये पांच मासिक किस्तों में राजस्व मद में जमा करने का निर्देश दिया है. डीसीएलआर राजीव कुमार अभी सहरसा जिले में पदस्थापित हैं.
इस मामले में आम आदमी पार्टी के गोह प्रखंड सचिव त्रिपुरारी पांडेय द्वारा हल्का कर्मचारी अनुग्रहित राम द्वारा एक जमीनी मामले में अनियमितता बरते जाने से संबंधित आवेदन दिया था. इसके विरुद्ध इसकी जांच तत्कालीन डीसीएलआर राजीव कुमार द्वारा किया जाना था.
इसका प्रतिवेदन जिलाधिकारी को सौंपना था. इसके बाद छह फरवरी 2012 को आवेदक ने जिलाधिकारी से 30 फरवरी 2010 को दिये गये आवेदन पर की गयी जांच से संबंधित सूचनाएं मांगी थी. परंतु कोई जानकारी नहीं दी गयी. इसके बाद आवेदक ने राज्य सूचना आयोग को पत्र लिखा, जहां सुनवाई के दौरान सूचनाएं नहीं दिये जाने की स्पष्टीकरण भी पूछा गया.
फिर एक लंबी अवधि के बाद इसी वर्ष सात मार्च को सुनवाई हुई, लेकिन इतनी लंबी अवधि व समुचित अवसर दिये जाने के बावजूद डीसीएलआर राजीव कुमार द्वारा स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया, न ही आवेदक को कोई सूचनाएं दी गयी. इसके बाद आयोग ने सूचना देने में जानबूझ कर विलंब किये जाने को आरोप मानते हुए यह जुर्माना लगाया.
अर्थदंड लगाये जाने से संबंधित आयोग के अवर सचिव प्रमोद कुमार सिन्हा के हस्ताक्षर से जारी पत्र को आवेदक के साथ-साथ आयोग के सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव, जिलाधिकारी औरंगाबाद व सहरसा सहित डीसीएलआर राजीव कुमार को भेजा गया है.
