छुट्टी लेने के लिए बहाने पर बहाने

– सुधीरकुमारसिन्हा – इयरइंड पर पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी तक में छुट्टी लेने की होड़ औरंगाबाद : समाहरणालय के एक विभाग में गुरुवार को बड़े साहब उस समय चौंक गये, जब उनके कार्यालय के चार-पांच कर्मचारी एक साथ ठंड लगने, उलटी की शिकायत व लूज मोशन जैसी बीमारी से पीड़ित हो गये. इन कर्मचारियों का […]

– सुधीरकुमारसिन्हा –

इयरइंड पर पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी तक में छुट्टी लेने की होड़

औरंगाबाद : समाहरणालय के एक विभाग में गुरुवार को बड़े साहब उस समय चौंक गये, जब उनके कार्यालय के चार-पांच कर्मचारी एक साथ ठंड लगने, उलटी की शिकायत व लूज मोशन जैसी बीमारी से पीड़ित हो गये. इन कर्मचारियों का आवेदन सामने पड़ा था. यह देख बड़े साहब के मन में कई तरह के विचार उमड़ रहे थे.

सभी को एक ही सप्ताह की छुट्टी चाहिए था. बड़े साहब ने सभी कर्मचारियों को बुलाया. सबके चेहरे बिल्कुल खिले हुए थे. किसी भी दृष्टिकोण से बीमारी की झलक तक नहीं थी. साहब मुस्कुराये व कहा कि डॉक्टर का प्रेस्क्रिप्शन लेकर सभी आइये.

इसके बाद कर्मचारियों को छुट्टी नामंजूर होने की चिंता सताने लगी. आखिरकार एक कर्मचारी ने कहा-सर, साल खत्म होने को है और छुट्टियां बेकार जा रही थीं. सोचा साल के अंत में छुट्टी लेकर बाल-बच्चे व परिवार के साथ रहूं. दफ्तर चाहे सरकारी हो या निजी. हर जगह ईयरइंड पर यही आलम है. कर्मचारियों में छुट्टी लेने की होड़ मची है. समाहरणालय के कई विभागों में छुट्टी की अर्जी थोक में है.

कनीय पदाधिकारियों से लेकर चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी तक छुट्टी लेने के बहाने तलाश रहे हैं. साल खत्म होने के पहले सभी छुट्टियों को उपयोग कर लेना चाहते है. वरीय पदाधिकारियों का तो कहना ही क्या. कार्यालय के काम से निकल पड़े, दो-चार दिनों के लिए बाहर. कुछ इसी तरह का हाल सदर अस्पताल का भी है. यहां पदस्थापित कई डॉक्टर छुट्टी लेने की कोशिश में लगे हैं. पर, वे अपनी कोशिशें कामयाब नहीं होता देख, कुछ दूसरी योजना बनाने में लगे हैं.

मतलब अपनी मरजी से छुट्टी. हद तो तब हो गयी जब एक विभाग के कर्मचारी अपनी छुट्टी मंजूर कराने की आपाधापी में यह भी भूल गये कि अभी खरमास चल रहा है. शादी-ब्याह के लिए तो शुभ मुहूर्त नहीं ही है. साधारणतया होतीं भी नहीं है. फिर भी अपने आवेदन में शादी के नाम पर छुट्टी लेने पहुंच गये. उन्हें खरमास होने की जब याद दिलाया गया तो तुरंत आवेदन को बदल कर सगे-संबंधी की बीमारी से जोड़ दिया. वैसे तो सरकारी कार्यालयों में छुट्टियां लेने पर पाबंदी नहीं होती, लेकिन निजी कार्यालयों की हालत बेहद खराब है.

हालांकि कुछ ऐसे लोग भी है जो सीधे अपने बॉस को बता रहे हैं कि बच्चों का स्कूल बंद होते ही कहीं बाहर घूमने का प्लान है. इसके अलावे भी कर्मचारी कई अन्य तरह के बहाने ढूंढ़ रहे हैं. किसी भी तरह अपनी छुट्टी मंजूर कराने की फिराक में लगे हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >