औरंगाबाद कार्यालय : नवीनगर में रेल मंत्रालय व एनटीपीसी द्वारा संयुक्त रूप से लगाये जा रहे बीआरबीसीएल परियोजना में आवासीय भूमि के विवाद पर सहमति नहीं बनी. मंगलवार को समाहरणालय के सभाकक्ष में विवाद को समाप्त करने के लिए डीएम कंवल तनुज की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. इसमें विस्थापित प्रभावित किसान मजदूर संघर्ष समिति के सरंक्षक सह स्थानीय सांसद सुशील कुमार सिंह, अध्यक्ष नागेंद्र सिंह, सचिव राजेश्वर सिंह, बीआरबीसीएल के सीओ राजकुमार प्रसाद, एजीएम एसके सिंह, डीजीएम एचआर नवनीत कुमार, आरएनआर मनोज कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे.
बैठक लगभग पांच घंटे तक चली, जिसमें चार घंटे तक आवासीय भूमि के मुआवजा पर चर्चा हुई. समिति नयी-भू अर्जननीति के तहत मुआवजे की मांग कर रही थी. बीआरबीसीएल के पदाधिकारी 2008 में हुए एकरारनामे के अनुसार मुआवजा देने की बात कर रहे थे. इस बीच डीएम दोनों पक्षों की बात गंभीरता से सुन रहे थे. दोनों पक्षों को सुनने के बाद डीएम ने कहा कि हम भावनाओं में जाकर कुछ निर्णय नहीं ले सकते, जो भी निर्णय लेंगे उसका कानूनी आधार भी होगा. अगर उस निर्णय से किसान या कंपनी के अधिकारी संतुष्ट नहीं है, तो कोर्ट में जाकर अपनी बात रख सकते हैं.
न्यायालय का जो भी आदेश होगा, उसे हम सभी लोग मानेंगे. डीएम ने यह भी कहा कि दो पक्षों में जब समझौता होता है, तो उसमें जिद की कई कोई जगह नहीं होनी चाहिए. समझौता खुले मंच से होना चाहिए़ डीएम ने कहा कि वह मिले अधिकारों के तहत ही काम करेंगे.
बैठक में सांसद ने कहा कि वह परियोजना का विरोधी नहीं हैं. वह स्थापना काल से इससे जुड़े हैं. किसान चाहेंगे कि उनकी जमीन की अधिक कीमत मिले, क्योंकि इन्होंने अपनी जमीन बेचा नहीं है, स्वेच्छा से दी है. सांसद ने यह भी कहा कि इसका भी ध्यान रखना है कि परियोजना का पर जितना खर्च आयेगा, यहां से पैदा होनेवाली बिजली उतनी ही अधिक महंगीहोगी. समिति के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह ने कहा कि नई भू अर्जन नीति के तहत जमीन का मुआवजा मिले. अंत में दोनों पक्षों ने कहा कि डीएम जो निर्णय लेंगे, वह मान्य होगा.
