औरंगाबाद ग्रामीण : दुनिया में हर मां-बाप का पहला अरमान होता है कि उसका संतान सुखी जीवन जिये. संतान पर कोई विपत्ति आने से पहले मां-बाप को इसका अहसास हो जाता है. मां-बाप की कामना होती है कि संतान को उनकी भी उम्र लग जाये. एक ऐसे ही एक मां बाप हैं, जिन्होेंने अपने संतान के सुखी जीवन के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया. बेटों के इलाज में उनकी आर्थिक स्थिति जवाब देने लगी है, ऐसे में उन्हें मदद की दरकार है.
रोहतास जिले के नोखा प्रखंड के राजपुर गांव निवासी बिहारी सोनी के दो पुत्र चार वर्षीय पवन कुमार व तीन वर्षीय सूरज कुमार थैलीसीमिया बीमारी से पीड़ित हैं. हर महीने दोनों बच्चों को खून की जरूरत होती है. खून की जरूरत पूरी करते-करते बिहारी सोनी की आर्थिक स्थिति भी अब खराब हो गयी है. गुरुवार की सुबह बिहारी सोनी की पत्नी प्रेमलता देवी अपने दोनों बच्चों के साथ औरंगाबाद शहर स्थित ब्लड बैंक पहुंचीं. इस दौरान प्रेमलता ने बताया कि वह अपने पति-बच्चे के साथ मध्यप्रदेश के रेनुकोट जिले के शक्तिनगर में रहती है.
गुमटी खोल कर घर-परिवार का भरण-पोषण किया जा रहा है. जन्म के आठ माह बाद ही पवन थैलीसिमिया से पीड़ित हो गया. इसकी जानकारी वाराणसी के बीएचयू में इलाज के दौरान मिली. पवन का इलाज शुरू ही हुआ था कि दूसरे बेटे सूरज को भी इस बीमारी ने जकड़ लिया. इनके इलाज में उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गयी है. प्रेमलता ने बताया कि शुरू में बच्चों के लिए खून रोहतास में मिल जाता था.
लेकिन, बाद में परेशानी उत्पन्न हो गयी. मध्यप्रदेश के शक्तिनगर में भी आसानी से खून उपलब्ध नहीं होता है. एक सज्जन ने बताया था कि औरंगाबाद ब्लड बैंक से आसानी से खून उपलब्ध हो जायेगा. पिछले एक साल से लगातार औरंगाबाद से ही दोनों बच्चों को खून चढ़वाती आ रही हूं. ब्लड बैंक के कर्मचारी सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि अब तक 10 से 12 बार दोनों बच्चों को नि:शुल्क खून उपलब्ध कराया गया है. वैसे भी थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों को नि:शुल्क में खून देने का प्रावधान है.
देव हाॅस्पिटल के चिकित्सक डाॅ अभय कुमार ने बताया कि थैलीसीमिया खतरनाक व गंभीर बीमारी है. इसका इलाज थोड़ा महंगा है. स्टेमसेल थेरेपी से इसका इलाज संभव है. इस बीमारी में रेड ब्लड सेल्स की लाइफ और हिमोग्लाबिन का लेवल घट जाता है. इसका इलाज मुंबई में मुमकिन है.
