मदनपुर (औरंगाबाद) : देव प्रखंड के बाद मदनपुर प्रखंड के कई गांवों में हाथियों के झुंड ने फसलों पर कहर बरपाया है. सोमवार की रात हाथियों को खदेड़ने में वन विभाग के साथ विभिन्न गांवों के ग्रामीण लगे रहे. स्थानीय प्रशासन के द्वारा लोहे के रॉड में 200 मशाल बनाये गये और दूर तक अंधेरा भेदने वाले टार्च की व्यवस्था की गयी. रात होने का प्रतिक्षा हुआ. रात आठ बजते ही हजारों ग्रामीण के सहयोग से हाथियों के झुंड को गरडीह गांव से खदेड़ना शुरू हुआ.
प्रशासन व वन विभाग का प्रयास था कि पटनवा, सैलवां, घोरहट के रास्ते इन्हें उमगा पहाड़ होते हुए झारखंड की सीमा में प्रवेश करा दिया जाये,लेकिन हाथियों का झुंड जमुगाइन भट्ठा से आगे नहीं बढ़ा. हाथी भगाने के क्रम में बीडीओ अतुल प्रसाद, पुलिस अंचल निरीक्षक केके साहनी, अंचलाधिकारी अजीत कुमार बाल-बाल बचे. बीडीओ के अनुसार हाथियों का दल उनसे 200 गज की दूरी पर था. ये लोग एक जीप में बैठ कर उसकी रोशनी से ग्रामीणों को हाथी खदेड़ने में मदद कर रहे थे,तभी हथियों का झुंड एकाएक पीछे की ओर मुड़ा तथा इनके जीप की तरफ लपका. हथियों के हमले को भांप कर तीनों पदाधिकारी जान बचाते हुए जीप से भागे व रात में हाथी भगाने का काम बंद हो गया.
दो बजे के करीब सारे ग्रामीण व पदाधिकारी वापस चले गये. मंगलवार की सुबह हाथियों का झुंड भइया राम बिगहा के समीप खेतों में देखा गया. ग्रामीणों ने हिम्मत जुटा कर उसे पूरब दिशा की ओर खदेड़ा. दिन के नौ बजे के करीब सलैया थाना क्षेत्र के डिप्टी बिगहा, लखनपुर के जंगल में पहुंचा दिया. दिन के 12 बजे हाथियों का झुंड चाल्हों की तलहटी से बढ़ते हुए चौथइया बंसत होते हुए दुगुल टाल में पहुंच गया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग के कर्मचारी व ग्रामीणों ने शाम चार बजे दुगुल टाल से पुन: दक्षिण दिशा की ओर हाथियों को भगाना शुरू किया.
प्रशासन व स्थानीय लोगों का प्रयास है कि मदनपुर के दक्षिण जो बड़की जोन पहाड़ी है उसका संपर्क चतरा व झारखंड से है, उन्हें वहां भगा दिया जाये. लेकिन हाथियों के तांडव से पूरे इलाके के लोगों में दहशत व भय का वातावरण कायम हो चुका है. लोग रतजगा करने को मजबूर हैं. हाथियों के झुंड से सैकड़ों एकड़ में लगी गेहूं व सरसों की फसल को नुकसान हुआ है. नुकसान के बजाय किसान पहले सुरक्षा चाहते हैं. उसके बाद ही फसलों के नुकसान का आकलन करेंगे.
