औरंगाबाद (कोर्ट) : सबक नहीं लेने के कारण जिले की पुलिस नक्सलियों द्वारा बिछायी गयी मौत की जाल में हर बार फंसती रही है. ऐसा कभी भी नहीं हुआ कि नक्सलियों की साजिश का भंडाफोड़ हुआ हो और उनकी साजिश नाकामयाब हुई हो.
किसी भी घटना को अंजाम देने से कई दिन पहले नक्सली अपनी बिसात बिछाते हैं और पुलिस वाले मारे जाते हैं.
इसका ताजा उदाहरण मंगलवार को नवीनगर टंडवा रोड में टेल्हापुर के समीप नक्सलियों द्वारा दी गयी लैंड माइंस विस्फोट की घटना है, जिसमें कुल आठ पुलिस जवान शहीद हुए. इसके पहले पिछले वर्ष ही ढ़िबरा थाना की पुलिस जीप को नक्सलियों ने अपना निशाना बनाया था.
उस समय ढ़िबरा थाना में पदस्थापित थानाध्यक्ष इंद्रजीत कुमार भी जिला मुख्यालय में आयोजित क्राइम मीटिंग में भाग लेकर वापस लौट रहे थे. इसके पूर्व वर्ष 2009 में नवीनगर में नक्सलियों ने बीएमपी के पांच जवानों पर हमला किया था, जिसमें पांचों जवान शहीद हो गये.
दरअसल, वर्ष 2009 में चार मई को बीएमपी के जवान गश्त पर निकले थे. बेहद भीड़-भाड़ वाले इलाके में मुख्य जगहों में से एक पंजाब नेशनल बैंक के समीप पूर्व से घात लगाये नक्सलियों ने हमला किया था, जिसमें पांच बीएमपी के जवानों को जान चली गयी थी और उनके आधुनिक हथियार भी लूट लिये गये थे.
पांच वर्ष पूर्व भी मदनपुर प्रखंड में सीआरपीएफ कैंप पर नक्सलियों ने हमला किया था और बमबारी की थी. नक्सली लगातार एक-एक कर ढ़िबरा, टंडवा थाना सहित पुलिस को अपना निशाना बनाते रहे हैं. वर्ष 2010 में भी विधानसभा चुनाव के दौरान पुलिस वाहन को निशाना बनाने के उद्देश्य से देव-ढ़िबरा पथ में पचौखर के पास बम प्लांट किया गया था.
पर, वह समय से नहीं फटा और बाद में फटने से सात बच्चों की मौत हो गयी थी. इन सभी घटनाओं से यही प्रतीत होता है कि किसी भी घटना से पुलिस सबक नहीं लेती और लगातार नक्सलियों के चंगुल में फंस कर जान गंवाती रही है.
