स्कूलों में गंदगी मिले, तो कार्रवाई और बीआरसी का कोई माई-बाप नहीं फोटो नंबर-24,परिचय-बीआरसी भवन में लगे बिछावन अंबा (औरंगाबाद).स्कूल कैंपस या रूम में यदि गंदगी मिलती है, तो अधिकारी शिक्षकों के विरूद्ध कार्रवाई करने की बात करते हैं. सफाई व स्वच्छता संबंधी वर्ष में कई बार प्रशिक्षण दिया जाता है. साफ व स्वच्छ रहने के लिए बच्चों को पाठ पढ़ाया जाता है और नये-नये तरीके बताये जाते हैं. लेकिन, शिक्षा विभाग का प्रखंड कार्यालय बीआरसी में तो सफाई व स्वच्छता की धज्जियां उडाई जा रही है. देखने से ऐसा लगता है कि बीआरसी कार्यालय का कोई माई-बाप ही नहीं है. इसकी सफाई रखने का दायित्व भी यहां के अधिकारी व कर्मचारी नहीं समझते हैं. बाहर से बोर्ड देखकर लोग भले ही इसे शिक्षा विभाग का कार्यालय समझें, पर अदंर प्रवेश करते ही गंदगी का अंबार लगा देखने को मिलता है. कार्यालय के गेट पर जिस तरह से काई जमा है वैसा तो किसी गौशाले में भी देखने को नहीं मिलता है. इतना ही नहीं अंदर के कमरों का दृश्य देखने से तो पता चलता है कि यह चूहों का मान है. कार्यालय के जिस कमरे में प्रशिक्षण दिया जाता है, उसमें टाट व बिछावन तो लगा है, पर उसके आसपास भुर भुरे मिट्टी की ढेर है. जिस तरह से बिछावन लगाकर रखा गया है. यदि उस पर शिक्षक बैठ कर प्रशिक्षण लेंगे तो उन्हें खुजली व अन्य बीमारी भी हो सकती है. कार्यालय के शौचालय में तो मकड़जाल छाये हैं. देखने से पहली नजर में ही यह पता चलता है कि अधिकारी स्वच्छता के प्रति कितने सजग हैं. जब अधिकारी खुद सफाई रहने को तैयार नहीं हैं, तो दूसरो को इस बात का संदेश देना मजाक सा लगता है. गौरतलब है कि यदा-कदा स्कूली बच्चों को भी बीआरसी में बुलाकर प्रशिक्षण दिया जाता है. बच्चे इस गंदगी को देखकर भी अनुकरण करते हैं.
स्कूलों में गंदगी मिले, तो कार्रवाई और बीआरसी का कोई माई-बाप नहीं
स्कूलों में गंदगी मिले, तो कार्रवाई और बीआरसी का कोई माई-बाप नहीं फोटो नंबर-24,परिचय-बीआरसी भवन में लगे बिछावन अंबा (औरंगाबाद).स्कूल कैंपस या रूम में यदि गंदगी मिलती है, तो अधिकारी शिक्षकों के विरूद्ध कार्रवाई करने की बात करते हैं. सफाई व स्वच्छता संबंधी वर्ष में कई बार प्रशिक्षण दिया जाता है. साफ व स्वच्छ रहने […]
