औरंगाबाद कार्यालय : शहर के चर्चित व्यवसायी राजू हत्याकांड में पुलिस ने आरोपित महिला रंजू देवी के पति दयानिधि सिंह को हिरासत में लिया है. इन्हें इनके पैतृक गांव नवादा से नगर थाने की पुलिस लेकर रविवार की सुबह पहुंची. उसके बाद से लगातार पूछताछ हो रही है.
दयानिधि सिंह ने पूरी तरह से इस घटना में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है. बल्कि इन्होंने कहा है कि मेरा तो घर उजाड़ दिया गया. मैं पागल हो गया हूं. मेरी शादी रंजू देवी के साथ 1988 में हुई थी, उस वक्त 27 साल के थे और रंजू देवी की उम्र 22 साल थी.
1995 में पहली बार एक व्यक्ति चारपहिया वाहन से हमारे घर पहुंचा था और वह अपने नाम के आगे सिंह का टाइटल बताया था. रंजू ने उसे रिश्ता में चाचा कहा. घर के लोग विश्वास कर गये. लेकिन जब हम कपड़ा के लिए कोलकाता जाते थे तो मेरी पत्नी पूजा करने के बहाने नहर पर एक मंदिर में जाती थी और वहां एक कार आकर लगती थी, जिस पर एक लड़की भी रहती थी और वह व्यक्ति भी रहता था, जिसे मेरी पत्नी चाचा कहती थी. वहीं पर कुछ देर बात करने के बाद वह घर लौटती थी. जब गांव में इसकी चर्चा होने लगी, तब रंजू बोली की हम हजारीबाग जायेंगे.
वहां मेरे पिताजी सालूबेड़ा में दवा की दुकान चलाते थे. वहां रंजू 15 दिन रही थी. लेकिन दिन में वह घर में रहती थी और रात में उसी व्यक्ति के पास चल जाती थी, जिसको चाचा बताता था. एक दिन मेरे पिता जी को संदेश हुआ कि रात में कहां रहती है तो वह निकल पड़े. उन्हें कुछ जानकारी हुई तो एक कमरे में देखा तो रंजू के साथ बैठ कर वह व्यक्ति शराब पी रहा है, जो चाचा बताता था. मेरे पिता ने इस बात को उजागर करने की बात कही तो वहीं पर उन्हें हत्या करने की साजिश रचा गयी.
मेरे पिता रंजू को लेकर गांव आ गये, जहां कुछ ही दिन बाद उनकी हत्या कर दी गयी. इसके बाद रंजू को एक दिन वही व्यक्ति मेरे घर से कार में बैठा कर औरंगाबाद ले आया, जो चाचा कहता था और फिर हम उसे सदा-सदा के लिए रिश्ता तोड़ लिये, क्योंकि रंजू हमें नहीं चाहती थी, वह उस व्यक्ति के साथ ही रहना चाहती थी.
इसके बाद उससे मेरा कोई रिश्ता नहीं रहा और हमें इस घटना के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है. रंजू से जब मेरा कोई रिश्ता ही नहीं था तो हम उसके लिए कोई चिंता क्यों करते. या फिर उसके बारे में सोचने की क्या जरूरत थी. हम तो पागल बन गये हैं.
