Aurangabad Student Suicide : औरंगाबाद जिले के हसपुरा थाना क्षेत्र के टनकुपी गांव में शुक्रवार की रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले 15 वर्षीय सन्नी उर्फ राकेश कुमार ने फंदे के सहारे अपनी जान दे दी. घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में सनसनी फैल गई. वहीं परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.
कोचिंग नहीं गया, तलाश में जुटे परिजन
जानकारी के अनुसार सन्नी रोज की तरह अपने बड़े भाई और बहन के साथ कोचिंग पढ़ने जाता था. लेकिन शुक्रवार की शाम वह कोचिंग नहीं गया. जब काफी देर तक वह घर में नजर नहीं आया तो परिजन उसे खोजने लगे. इसी दौरान कुछ लोग घर की छत पर पहुंचे.
छत पर बने एक कमरे में जो दृश्य सामने आया, उसे देख सब सन्न रह गए. सन्नी फंदे के सहारे लटका हुआ था. यह देखते ही परिजनों के बीच अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार शुरू हो गई.
अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
परिजन तुरंत सन्नी को नीचे उतारकर इलाज के लिए हसपुरा अस्पताल लेकर पहुंचे. लेकिन वहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई.
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और परिजनों से पूछताछ शुरू की. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए औरंगाबाद भेज दिया. शनिवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया.
आत्महत्या के कारणों पर सस्पेंस
मृतक के पिता संजय राम ने बताया कि उनके बेटे ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है, लेकिन उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसकी जानकारी उन्हें भी नहीं है. परिवार अभी तक इस घटना को समझ नहीं पा रहा है.
वहीं गांव में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं. कुछ लोग पढ़ाई को लेकर डांट-फटकार को वजह बता रहे हैं. हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है. यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर इतनी कम उम्र में सन्नी ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया. सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
बढ़ती घटनाओं से लोग चिंतित
इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है. हाल के दिनों में औरंगाबाद जिले में आत्महत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है. खासकर किशोर छोटी-छोटी बातों को लेकर इस तरह के कदम उठा रहे हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में परिवार और समाज को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके.
