औरंगाबाद कार्यालय : केंद्र व बिहार सरकार द्वारा जन सरोकार के मुद्दों की अनदेखी किये जाने और बढ़ते भ्रष्टाचार के साथ-साथ जनता पर आये दिन हो रहे अत्याचार के खिलाफ वाम दल महागठबंधन के साथ सड़क पर उतर गया. महागठबंधन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गांधी मैदान से प्रदर्शन निकाली.
नारेबाजी के साथ प्रदर्शन मुख्य बाजार पथ होते हुए समाहरणालय पहुंची,जहां केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नेताओं ने जम कर भड़ास निकाली तथा समाहरणालय का घेराव किया. इस प्रदर्शन में वाम दल के अलावा राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा, समाजवादी पार्टी, वीआईपी, लोक जनतांत्रिक पार्टी के कार्यकर्ता शामिल हुए.
राजद के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ई सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि देश अराजकता के दौर से गुजर रहा है. दोबारा सत्ता में आयी एनडीए की सरकार जन सरोकार पर हमला कर रही है. जो सपना दिखा कर सत्ता में आयी थी वह सपने तार-तार हो गये. देश अघोषित आपातकाल से गुजर रहा है. प्रदेश महासचिव शंकर यादवेंदू ने कहा कि देश में भय, आतंक और दहशत का माहौल है.
विपक्ष को डरा धमा कर चुप रहने के लिए बाध्य किया जा रहा है. हम जिलाध्यक्ष हरेंद्र कुमार सिंह, रालोसपा जिलाध्यक्ष अशोक मेहता, सपा जिलाध्यक्ष तुलसी यादव, भाकपा के जिला सचिव उपेंद्रनाथ शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों ने देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचाया है. केंद्रीय सेवाओं में मिलने वाले आरक्षण की गलत व्याख्या सरकार करती आ रही है.
इसका नुकसान दलितों व पिछड़ों को उठाना पड़ेगा. राजद अति पिछड़ा के प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र कुमार चंद्रवंशी, वीआईपी के जिला महासचिव रामकुमार चौधरी ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार की तस्वीर बाढ़ के दौरान हर किसी ने देखा है. सुशासन की चमक ही उतर गयी. घोटालों की लंबी कतारें है.
आम लोगों का मोह पूरी तरह भंग हो चुका है. राजद के जिला उपाध्यक्ष उदय उज्जवल, इंदल सिंह यादव, प्रवक्ता डाॅ रमेश यादव, सुशील कुमार, बैजनाथ मेहता, रालोसपा के जैनेंद्र सिंह कुशवाहा, निर्भय पासवान, रामलखन सिंह यादव, रंजीत कुमार चौधरी, राजेश कुमार चौधरी, हम नेता सूरज कुमार राय, भीम प्रताप सिंह, राहुल कुमार आदि लोगों ने कहा कि अब एनडीए से आम जनता को छुटकारा दिलाने का समय आ गया है. आंदोलन समाप्ति के बाद महागठबंधन का एक शिष्टमंडल राज्यपाल के नाम संबंधित पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा.
