एक्सपायर्ड इंजेक्शन मामले में डीएम ने लिया संज्ञान
औरंगाबाद नगर : सदर प्रखंड के जम्होर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सपायर्ड इंजेक्शन दिये जाने के बाद एक व्यक्ति की हुई मौत मामले में जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल ने मामले को गंभीरता से लिया है. साथ ही बुधवार को पूरे मामले की जांच करने के लिए एक जांच कमेटी का गठन सिविल सर्जन डॉ जनार्दन […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
औरंगाबाद नगर : सदर प्रखंड के जम्होर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सपायर्ड इंजेक्शन दिये जाने के बाद एक व्यक्ति की हुई मौत मामले में जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल ने मामले को गंभीरता से लिया है. साथ ही बुधवार को पूरे मामले की जांच करने के लिए एक जांच कमेटी का गठन सिविल सर्जन डॉ जनार्दन प्रसाद के नेतृत्व में किया.
इसकी जानकारी देते हुए जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल ने बताया कि जम्होर निवासी 70 वर्षीय श्रवण कुमार की मौत किन कारणों से हुई है और एक्सपायर्ड दवा किसके द्वारा दिया गया है, इस पूरे मामले की जांच करते हुए दोषी लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए सिविल सर्जन औरंगाबाद को निर्देश दिया गया है. इस तरह की लापरवाही किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जायेगी. इसमें जो भी पदाधिकारी या कर्मी दोषी पाये जायेंगे सभी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी. डीएम ने आगे यह भी कहा कि सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में मरीजों को एक्सपायर्ड दवा नहीं दें,
बल्कि समुचित इलाज करते हुए जीवन रक्षक दवाएं देना सुनिश्चित करेंगे. यह एक गंभीर मामला है कि अस्पताल में स्टाॅक रहते हुए दवा एक्सपायर्ड हो गया. यदि समय रहते उस इंजेक्शन का उपयोग जरूरतमंद मरीजों के बीच कर दिया जाता तो शायद इस तरह की स्थिति सामने नहीं आती. डीएम ने यह भी कहा कि यदि मरीज के परिजन गरीबी रेखा से नीचे आते हैं तो वे पारिवारिक लाभ योजना के लिए संबंधित पदाधिकारी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं.
बस स्टैंड पर नहीं लगी किराया सूची, मनमाने पैसों की वसूली
किराया लेकर भी सीट नहीं दे रहे बस संचालक
बस स्टैंड से पटना, सासाराम, बोकारो, रांची आदि जगहों पर जाने वाली अधिकांश बसों में सीट से अधिक यात्री बैठाये जाते हैं, लेकिन बस में सवार यात्री सीट पर बैठा हो तब या खड़ा हो तब उससे एक जैसा ही किराया लिया जा रहा है. वहीं एसी डिलक्स बसों की स्थिति तो और खराब है. एसी डिलक्स बसों में सीट के अलावा ड्राइवर व खलासी स्टूल रखे हैं. सीट से अधिक सवारी होने पर स्टूल को बीच में रख कर यात्रियों को बैठाया जाता है और उनसे वही किराया लिया जाता है जो सीट पर बैठे हुए यात्रियों से लिया जाता है.
एसी डिलक्स बसों का किराया अन्य बसों के किराया से 20 प्रतिशत अधिक लिया जा रहा है. वहीं छोटे बच्चों का किराया भी अन्य यात्रियों की तरह ही लिया जा रहा है. जिले में ग्रामीण सड़कों पर चलनेवाली सवारी वाहनों का भी किराया अधिक वसूला जा रहा हैं. बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. पक्ष जानने के लिए डीटीओ से मोबाइल पर संपर्क किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका.