आर्थिक दिक्कत से जूझ रहे हैं प्रेरक
समय पर और तन्मयता से करते हैं सभी काम फिर भी नहीं मिल रहा मानदेय
हसपुरा : लगभग डेढ वर्षों से प्रेरकों को मानदेय नहीं मिल रहा है,जिससे साक्षर भारत मिशन के प्रखंड प्रेरकों के समक्ष पारिवारिक संकट गहराता जा रहा है और मानदेय नहीं मिलने से उनके चेहरों पर मायूसी छायी हुई है. बताया जाता है कि 19 माह से उन्हें कार्य के बदले मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है. ये आर्थिक विपन्नता से जूझ रहे हैं और उनके बीच भुखमरी के साथ पारिवारिक स्थिति उत्पन्न हो गयी है. प्रखंड समन्वयक नरेश कुमार बताते हैं कि एक तो प्रेरकों को मानदेय के रूप में मात्र 2000 प्रतिमाह निर्धारित है और यह भी पैसा इतने दिनों तक रुका रहे यह काफी निंदनीय है.
कहा कि आज के महंगाई के इस युग में इन्हें अपने परिवार के परवरिश के लिए कम से कम 10 हजार रुपये प्रति माह किया जाना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि कार्य के एवं में इन्हें मानदेय तो अब तक नहीं बढ़ाया गया और वह भी पैसा समय पर नहीं मिलता. प्रेरक शिवशंकर वर्मा, अशोक कुमार सिंह, करन कुमार, नरेश कुमार, किशुन प्रसाद, नारायण कुमार, मंजू कुमारी, बबिता कुमारी, सुनीता कुमारी, रेणु कुमारी, रिंकी कुमारी ने कहा कि हमलोग सरकार के साक्षरता अभियान के लिए सरकार के निदा निर्देश में मेहनत व ईमानदारी से कार्य किया है. सरकार के कार्यक्रमों में बाल विवाह, नशामुक्त कार्यक्रम, मानव शृंखला निर्माण जैसी कई चल रही योजनाएं को सफल बनाने में कार्य किया है. हाल के दिनों में प्रेरकों द्वारा नवसाक्षर महिलाओं के बीच महापरीक्षा के आयोजन में बढ़-चढ़ कर भूमिका निभायी थी. इनका कहना है कि वे सभी ईमानदारी व मुस्तैदी से कार्य करते रहे हैं. बावजूद मानदेय नहीं मिल रहा है. कहा कि हम लोगों की स्थिति पर न तो केंद्र सरकार का ध्यान है और न ही राज्य सरकार का. स्थिति यह है कि प्रखंड के कुल 26 प्रेरक पैसों के लिए मुहताज बने हुए हैं. प्रेरकों ने केन्द्र व राज्य सरकार से उन्हें शीघ्र मानदेय दिलाने व मानदेय में वृद्धि करने की मांग उठायी है.
