डीएम ने सिविल सर्जन व उपाधीक्षक को व्यवस्था में सुधार लाने का दिया निर्देश
औरंगाबाद नगर : सदर अस्पताल को आदर्श अस्पताल का दर्जा मिले पांच वर्ष बीत गये, लेकिन यह अस्पताल अब तक आदर्श अस्पताल नहीं बन पाया. इसकी मुख्य वजह यह है कि व्यवस्था में सुधार लाने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, वे अपने निजी काम को करना ज्यादा बेहतर समझते हैं. इस अस्पताल में चिकित्सकों की घोर कमी है. यदि किसी महिला प्रसव पीड़ा से पीड़ित है और उसे सिजेरियन की आवश्यकता पड़ जाये तो पैरवी नहीं रहने पर बाहर जाने के सिवा कोई उपाय नहीं है.
कुछ ऐसा ही मंगलवार को प्रसव कक्ष में देखने को मिला. एक महिला नीतू देवी प्रसव पीड़ा से सोमवार की रात से कराह रही थी, उसे देखने तक के लिए कोई चिकित्सक तैयार नहीं था. मंगलवार की सुबह जब महिला को लेकर परिजन डॉ. निर्मला के यहां पहुंचे, तो उसने यह कहते हुए ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया कि उन्हें दूसरा सिजेरियन करने की जानकारी नहीं है. परिजनों ने महिला चिकित्सक से काफी विनती की, लेकिन उन्होंने साफ इन्कार कर दिया. इसके बाद डीएम राहुल रंजन महिवाल से संपर्क किया. शिकायत मिलते हुए डीएम ने सिविल सर्जन व उपाधीक्षक को फटकार लगायी. उसके बाद सदर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार लाते हुए महिला का ऑपरेशन करने का निर्देश दिया. बस क्या था डीएम का फटकार व निर्देश मिलने के बाद आनन-फानन में निजी चिकित्सक डाॅ मनीष कुमार व सदर अस्पताल के चिकित्सक डाॅ कुमार महेंद्र प्रताप ने महिला का ऑपरेशन किया. यदि डीएम के पास यह मामला नहीं पहुंचता तो शायद महिला का ऑपरेशन नहीं हो पाता.
