एशिया के सबसे पुराने रेल कारखाने का होगा कायाकल्प, 17 साल बाद पहुंचा कोई रेल मंत्री

Ashwini Vaishnaw In Bihar: 17 साल बाद देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को एशिया के सबसे पुराने जमालपुर रेल कारखाने का दौरा किया. पटना से ट्रेन से पहुंचे मंत्री का ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत हुआ और उन्होंने कारखाने में कई अहम योजनाओं की आधारशिला रखी.

Ashwini Vaishnaw In Bihar: देश और एशिया के सबसे पुराने जमालपुर रेल कारखाने ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक पल देखा, जब 17 साल बाद कोई रेल मंत्री वहां पहुंचे. इससे पहले लालू यादव वहां जाकर निरीक्षण किए थे. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव विशेष ट्रेन से पटना से रवाना होकर जैसे ही जमालपुर स्टेशन पहुंचे, स्टेशन परिसर में ढोल-नगाड़ों और भारत माता की जय के नारों से उनका जोरदार स्वागत हुआ. उनके स्वागत के लिए स्थानीय नेता, कार्यकर्ता और आम लोग सुबह से ही स्टेशन पर जुटे थे.

रेल मंत्री ने खुद क्रेन पर चढ़कर मशीनों का किया निरीक्षण

करीब 5 मिनट के संक्षिप्त ठहराव के बाद रेल मंत्री अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ जमालपुर रेल कारखाने के लिए रवाना हो गए. उनके साथ बिहार के कई बड़े नेता जैसे डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, ललन सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. कारखाने में पहुंचते ही रेल मंत्री ने खुद क्रेन पर चढ़कर मशीनों और वर्कशॉप्स का बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने कर्मचारियों से भी बातचीत की और उनकी कार्यशैली की सराहना की.

अत्याधुनिक वैगन पीओएच स्थल की आधारशिला भी रखी

इस मौके पर रेल मंत्री ने 78.96 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक वैगन पीओएच (Periodical Overhauling) स्थल की आधारशिला भी रखी. इस केंद्र के बनने से जमालपुर कारखाने की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और हर महीने 545 से 800 वैगनों की मरम्मत की जा सकेगी. यह रेलवे के मालवाहन ढांचे को और मजबूत करेगा.

जमालपुर रेलवे स्टेशन का भी किया दौरा

निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री ने वर्कशॉप में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीकों का जायजा लिया और अधिकारियों से उत्पादन और मरम्मत प्रक्रिया की जानकारी ली. इसके अलावा उन्होंने जमालपुर रेलवे स्टेशन का भी दौरा किया और यात्री सुविधाओं का अवलोकन किया. उन्होंने साफ-सफाई, पीने के पानी, वेटिंग एरिया और डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम की व्यवस्था पर संतोष जताया.

रेल मंत्री की यह यात्रा न केवल जमालपुर के लिए एक गौरव का क्षण रही, बल्कि इससे इस ऐतिहासिक रेल कारखाने के पुनर्जीवन की उम्मीद भी जगी है. स्थानीय लोगों और कर्मचारियों में ऊर्जा का नया संचार हुआ है और सभी को उम्मीद है कि आने वाले समय में जमालपुर फिर से रेलवे के नक्शे पर और मजबूती से उभरेगा.

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By Abhinandan pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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