शिक्षा और संस्कार से ही समाज का विकास, कर्मकांड पद्धति को प्रतिष्ठित करने पर जोर

सर्वभौम शाक्यदीपीय ब्राह्मण महासंघ द्वारा आयोजित संगोष्ठी में शिक्षा, संस्कार और कर्मकांड के महत्व पर प्रकाश डाला गया. वक्ताओं ने शिक्षा के व्यवसायीकरण और लोक कल्याण के कार्यों पर भी अपने विचार रखे.

Arwal News : अरवल शहर के एक निजी विवाह भवन में सर्वभौम शाक्यदीपीय ब्राह्मण महासंघ की ओर से समाज के गौरवशाली इतिहास, शिक्षा, चिकित्सा एवं कर्मकांड विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत भगवान भास्कर की पूजा और स्वस्ति वाचन के साथ हुई. वेदों के ज्ञाता एवं मुख्य अतिथि पुरुषोत्तमानंद गुरु, राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक कुमार उपाध्याय, साहित्यकार कमलेश पुण्यार्क सहित कई विद्वानों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया.

शास्त्रोचित कर्म से संस्कार पर जोर

मुख्य अतिथि पुरुषोत्तमानंद गुरु ने कहा कि संपूर्ण संसार का नियामक धर्म है और वेदों के माध्यम से धर्म का प्रतिपादन हुआ है. वर्तमान समय में गलत विचारों को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे सामाजिक संबंध प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने ब्रह्मोचित संस्कार अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि शास्त्रोचित कर्म अपनाने से आध्यात्मिक और वेदमूलक ज्ञान की प्राप्ति होती है तथा व्यक्ति में संस्कार विकसित होता है.

उन्होंने कहा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं होना चाहिए. गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से ही विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए.

लोक कल्याण के लिए कार्य करने की अपील

साहित्यकार कमलेश पुण्यार्क ने कहा कि हमारा समाज सूर्य तंत्र की स्थापना के लिए आया था. समाज के प्रत्येक व्यक्ति को लोक कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए. उन्होंने कहा कि संस्कारों को बरकरार रखते हुए समाज के हित में काम करने की आवश्यकता है.

शिक्षाविद वीणा मिश्रा ने कहा कि शिक्षा से ही संस्कार आता है. धर्म के बिना जीवन व्यर्थ है. उन्होंने कर्मकांड पद्धति को प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता पर बल दिया.

बड़ी संख्या में समाज के लोग हुए शामिल

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. प्रो. रघुवंश मिश्रा ने की. संचालन डॉ. विनोद उपाध्याय और अनुराधा मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया. इस अवसर पर आरके शर्मा, कामिनी बिमल भोजक, सतीश पांडेय, प्रमोद कुमार मिश्र सहित बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग मौजूद थे.

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By निशिकांत सिंह

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