बाल हृदय योजना बनी वरदान, अरवल के 18 बच्चों का कराया गया मुफ्त ऑपरेशन

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत अरवल जिले में दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों को नया जीवन मिल रहा है. अब तक 18 बच्चों का सफलतापूर्वक मुफ्त ऑपरेशन हो चुका है. यह योजना बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है.

Arwal News : अरवल जिले में हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना किसी वरदान से कम नहीं है. योजना के तहत जिले में दिल में छेद की समस्या से पीड़ित बच्चों का नि:शुल्क ऑपरेशन कराया जा रहा है. वर्ष 2022 से अब तक अरवल जिले के 18 बच्चों का गुजरात के अहमदाबाद में सफलतापूर्वक मुफ्त ऑपरेशन कराया जा चुका है, जबकि तीन बच्चे ऑपरेशन के लिए कतार में हैं.

स्क्रीनिंग से ऑपरेशन तक की पूरी प्रक्रिया

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की मोबाइल हेल्थ टीम आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती है. बीमारी की पहचान होने के बाद बच्चे की सदर अस्पताल में जांच करायी जाती है. बीमारी की पुष्टि होने पर पटना में जांच करायी जाती है. इसके बाद ऑपरेशन के लिए बच्चे को अहमदाबाद भेजा जाता है.

जिला समन्वयक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि छह वर्ष तक के बच्चों के इलाज के दौरान माता-पिता दोनों को साथ भेजा जाता है. वहीं छह से 18 वर्ष तक के किशोरों के ऑपरेशन के लिए माता या पिता में से किसी एक को साथ भेजा जाता है.

अब पटना में भी हो रहा है ऑपरेशन

डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि पहले बच्चों के हृदय के ऑपरेशन की सुविधा केवल गुजरात के अहमदाबाद में थी. अब पटना के मेदांता अस्पताल में भी ऑपरेशन किया जा रहा है. हालांकि अरवल जिला मेदांता से टैग नहीं है. इस कारण जिले से चयनित बच्चों को ऑपरेशन के लिए अहमदाबाद भेजा जाता है.

उन्होंने बताया कि निजी अस्पताल में दिल में छेद के ऑपरेशन पर करीब चार लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं. वहीं मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत सरकार बच्चों का ऑपरेशन नि:शुल्क कराने के साथ छह माह तक जांच की सुविधा भी मुफ्त उपलब्ध कराती है.

अन्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों का भी मुफ्त इलाज

बाल हृदय योजना के अलावा आरबीएसके की टीम आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की स्क्रीनिंग कर अन्य गंभीर बीमारियों की भी पहचान करती है. पैर मुड़े होने, तालू में समस्या और कटे होंठ जैसी जन्मजात समस्याओं से पीड़ित बच्चों का भी नि:शुल्क इलाज कराया जाता है.

जिले में नौ आरबीएसके टीम कर रही स्क्रीनिंग

आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि जिले के पांच प्रखंडों में नौ आरबीएसके टीम कार्यरत हैं. ये टीमें विभिन्न स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती हैं. एक टीम आंगनबाड़ी केंद्रों में और दूसरी टीम स्कूलों में जाकर बच्चों की जांच करती है.

आंगनबाड़ी केंद्रों में शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों की, जबकि स्कूलों में सात से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है. प्रतिदिन औसतन 70 से 75 बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है.

गंभीर बीमारी में बड़े अस्पतालों में भेजे जाते हैं बच्चे

आरबीएसके के तहत शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों में किसी गंभीर बीमारी की पहचान होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए आईजीआईएमएस, एम्स और पीएमसीएच जैसे बड़े अस्पतालों में भेजा जाता है.

स्क्रीनिंग के दौरान टीम में शामिल एएनएम बच्चों का वजन, लंबाई तथा सिर और पैर की माप करती हैं. फार्मासिस्ट स्क्रीनिंग किये गये बच्चों का विवरण रजिस्टर में दर्ज करते हैं. इसके आधार पर जरूरतमंद बच्चों को आगे के इलाज के लिए रेफर किया जाता है.

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By निशिकांत सिंह

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