अरवल में खेल मैदान की कमी से जूझ रहे युवा, क्रिकेट खिलाड़ी नेट प्रैक्टिस तक सीमित

Arwal News: अरवल में खेल मैदान की कमी के कारण युवा खिलाड़ी गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं. क्रिकेट खिलाड़ी केवल नेट प्रैक्टिस तक सीमित रह गए हैं, जिससे उनकी प्रतिभा पूरी तरह निखर नहीं पा रही है. सुविधाओं के अभाव में कई खिलाड़ी बेहतर अवसर की तलाश में दूसरे जिलों का रुख कर रहे हैं.

Arwal News: (निशिकांत की रिपोर्ट)
जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पर्याप्त खेल मैदान नहीं होने के कारण युवा खिलाड़ियों की प्रतिभाएं सामने नहीं आ पा रही हैं. अभ्यास के लिए खुला मैदान न मिलने से खिलाड़ी आगे बढ़ने का अवसर खो रहे हैं और कई प्रतिभाएं पलायन को मजबूर हैं.

नेट प्रैक्टिस तक सीमित हुए खिलाड़ी

स्थिति यह है कि खिलाड़ियों को इंडोर स्टेडियम या सीमित संसाधनों के सहारे ही अभ्यास करना पड़ रहा है. प्रशिक्षक अलवेला कुमार के अनुसार लगभग 30 खिलाड़ी नियमित रूप से नेट प्रैक्टिस करते हैं, लेकिन ग्राउंड प्रैक्टिस की सुविधा न होने से उनका समुचित विकास नहीं हो पा रहा है.

दूसरे शहरों पर निर्भर हैं खिलाड़ी

ग्राउंड की कमी के कारण खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए जहानाबाद, सासाराम और आरा जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है. नियमित मैदान उपलब्ध न होने से उनका प्रशिक्षण प्रभावित होता है और प्रदर्शन में निरंतरता नहीं बन पाती.

प्रतिभाओं का हो रहा पलायन

प्रशिक्षक ने बताया कि कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बेहतर सुविधाओं की तलाश में बाहर चले गए हैं. इनमें मो खालिद दिल्ली, लवकेश कुमार, आनंद राज और फैयाज़ आलम पटना में स्थायी रूप से प्रशिक्षण ले रहे हैं.

राज्य स्तर तक पहुंचे खिलाड़ी

इसके बावजूद कुछ खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों में बेहतर प्रदर्शन किया है. प्रशिक्षित खिलाड़ी मो इरफान आलम अंडर-16 बिहार टीम का हिस्सा रह चुके हैं. वहीं सुजीत कुमार, दुर्गेश कुमार, अतुल शक्ति, अंकित कुमार, आयुष कुमार, कृष आनंद, ऋषव कुमार और आशीष कुमार जिला टीम से खेल रहे हैं.

पांच घंटे तक चलती है नेट प्रैक्टिस

प्रशिक्षक के अनुसार खिलाड़ी प्रतिदिन लगभग पांच घंटे तक नेट प्रैक्टिस करते हैं. 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे आगे जाकर बेहतर प्रदर्शन कर सकें.

सुविधाओं की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा

स्थानीय खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का मानना है कि यदि जिले में उचित खेल मैदान और सुविधाएं उपलब्ध हों, तो यहां से कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं. वर्तमान में संसाधनों की कमी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.

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