अरवल सदर अस्पताल में ICU का सपना अधूरा, सुविधा नहीं होने से हर दिन गंभीर मरीज हो रहे रेफर

Arwal News: अरवल सदर अस्पताल में आईसीयू सुविधा नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए पटना रेफर करना पड़ रहा है. जिले में किसी भी सरकारी अस्पताल में आईसीयू उपलब्ध नहीं है, जिससे सड़क हादसा, हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अस्पताल प्रशासन ने बताया कि निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर वार्ड में भविष्य में आईसीयू की सुविधा शुरू की जाएगी.

Arwal News: (निशिकांत कि रिपोर्ट)
जिले के सबसे बड़े सदर अस्पताल में अब तक आईसीयू (ICU) की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है. नतीजतन गंभीर मरीजों को इलाज के लिए पटना रेफर करना पड़ रहा है. अस्पताल में आईसीयू निर्माण की योजना स्वीकृत होने के बावजूद जगह के अभाव में यह परियोजना अधर में लटक गई है.

जगह की कमी से अधर में लटका ICU निर्माण कार्य

मिशन-60 के तहत सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना बनाई गई थी. इसी क्रम में अस्पताल में आईसीयू स्थापित करने के लिए बीएमएसएसआईसीएल द्वारा टेंडर भी जारी किया गया और स्वीकृत भी हो गया. लेकिन अस्पताल परिसर में पर्याप्त जगह नहीं मिलने के कारण योजना पर ब्रेक लग गया.

पूरे जिले में नहीं है एक भी ICU, मरीजों की बढ़ी मुश्किल

अरवल जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं है. ऐसे में गंभीर रूप से घायल या बीमार मरीजों को इलाज के लिए पटना के बड़े अस्पतालों में भेजना पड़ता है. इससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है.

गंभीर मरीजों की जान पर बढ़ा संकट

सड़क दुर्घटना, गोली लगने, आग से झुलसने, दमा, हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज जैसे मामलों में मरीजों को तत्काल आईसीयू की जरूरत होती है. लेकिन सुविधा नहीं होने के कारण ऐसे मरीजों को रेफर करना पड़ता है, जिससे उनकी जान पर खतरा बढ़ जाता है.

65 किलोमीटर दूर पटना पहुंचने से पहले टूट जाती है सांस

गंभीर मरीजों को एम्स पटना या पीएमसीएच भेजा जाता है, जो अरवल से करीब 65 किलोमीटर दूर हैं. कई बार मरीजों की हालत इतनी नाजुक होती है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो जाती है.

आधुनिक अस्पताल, लेकिन सुविधाओं का अब भी अभाव

सदर अस्पताल का भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाया गया है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक स्वास्थ्य संसाधनों की अब भी भारी कमी है. करोड़ों रुपये की लागत से बना अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर भी अब तक पूरी तरह उपयोग में नहीं आ सका है.

हर दिन पांच से ज्यादा मरीज हो रहे रेफर

अस्पताल सूत्रों के अनुसार केवल सदर अस्पताल से ही प्रतिदिन पांच से अधिक गंभीर मरीजों को आईसीयू सुविधा नहीं होने के कारण रेफर किया जाता है. नाजुक स्थिति वाले मरीजों के लिए रेफरल ही एकमात्र विकल्प बन गया है.

क्रिटिकल केयर वार्ड से जगी उम्मीद

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल आईसीयू नहीं है, लेकिन क्रिटिकल केयर वार्ड का निर्माण कार्य चल रहा है. इसके पूरा होने के बाद उसमें आईसीयू की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे जिले के मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

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