अरवल शहर में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए नहीं है चार्जिंग प्वाइंट, ई-रिक्शा चालक परेशान

अरवल शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन नगर परिषद क्षेत्र में एक भी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन नहीं है. ई-रिक्शा चालक दुकानों, गैरेज और घरों में बैटरी चार्ज करने को मजबूर हैं. इससे बिजली पर दबाव और आग लगने का खतरा बढ़ रहा है. नगर परिषद ने आवंटन मिलने पर स्टेशन बनाने की बात कही.

Arwal News: (निशिकांत की रिपोर्ट) अरवल शहर में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ई-रिक्शा, ऑटो, दोपहिया और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहन तेजी से सड़कों पर उतर रहे हैं, लेकिन नगर परिषद क्षेत्र में अब तक एक भी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था नहीं की गई है. इससे ई-रिक्शा चालकों और इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

शहर की सड़कों पर हजारों की संख्या में ई-वाहन चल रहे हैं, लेकिन उन्हें चार्ज करने के लिए कोई सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं है. मजबूरन वाहन चालक घरों, दुकानों और निजी स्थानों पर बैटरी चार्ज कर रहे हैं.

दुकानों और गैरेज में हो रही बैटरी चार्जिंग

चार्जिंग स्टेशन नहीं होने के कारण अधिकांश ई-रिक्शा चालक अपने घरों या किराये के कमरों में वाहन की बैटरी चार्ज करते हैं. कई चालक बाजार की दुकानों और गैरेज में भी बैटरी चार्ज कराने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मोहल्लों में रात के समय एक ही बिजली लाइन से दर्जनों ई-वाहनों की बैटरियां चार्ज होती हैं. इससे बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और आग लगने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है.

नगर परिषद को हो सकता है राजस्व लाभ

शहरवासियों का कहना है कि यदि नगर परिषद द्वारा व्यवस्थित चार्जिंग स्टेशन बनाया जाए तो इससे न केवल ई-रिक्शा चालकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि नगर परिषद को भी अच्छा-खासा राजस्व प्राप्त हो सकता है. साथ ही अवैध बिजली कनेक्शन और आगजनी जैसी घटनाओं पर भी रोक लग सकेगी.

क्या कहते हैं नगर परिषद के पदाधिकारी

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मोनू कुमार ने बताया कि कुछ महीने पहले विभाग की ओर से इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाने संबंधी पत्र प्राप्त हुआ था, लेकिन अब तक आवंटन नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका है. उन्होंने कहा कि जैसे ही विभाग से आवंटन प्राप्त होगा, शहर में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन का निर्माण कराया जाएगा।

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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