Arwal News: (निशिकांत कि रिपोर्ट)
अरवल सदर अस्पताल परिसर में आधुनिक सुविधाओं से लैस 42 बेड का पीकू वार्ड बनाया गया है. लेकिन इसका लाभ जिले के बच्चों को नहीं मिल रहा है. पीकू वार्ड में आने वाले बच्चों को सिर्फ ओपीडी की सुविधा मिल रही है. किशोर के इलाज के लिए बने इस अस्पताल में गंभीर अवस्था में इलाज के लिए आए किशोर को सिर्फ रेफर किया जाता है। शाम के बाद वार्ड में ताला लटक जाता है. ढाई करोड़ की लागत से निर्मित पीकू वार्ड का दो वर्ष पहले विधिवत उद्घाटन किया गया था.
दोपहर के बाद अस्पताल में लटका ताला
पीकू वार्ड में एक चिकित्सक चार नर्सिंग स्टाप एक लिपिक और दो कार्यालय परिचारी पदस्थापित हैं. लेकिन वार्ड में आने वाले बच्चों को सिर्फ प्राथमिक उपचार किया जाता है. अस्पताल सूत्रों की माने तो ओपीडी में सुबह में एक चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी रहते हैं. लेकिन दोपहर में ओपीडी की अवधि समाप्त होने के बाद उसमें ताला लटक जाता है. इसके बाद मरीज चिकित्सक का इंतजार करते रहते हैं. ऐसे में गंभीर बच्चों को चिकित्सक रेफर कर देते हैं या उनके अभिभावक स्वयं निजी क्लीनिक में जाने को विवश होते हैं.
आईसीयू की व्यवस्था होने के बाद भी नहीं मिल रहा लाभ
जिले के कोई भी अस्पताल में आईसीयू की व्यवस्था नहीं है पीकू वार्ड में आईसीयू की व्यवस्था है लेकिन चिकित्सक और कर्मियों के अभाव में इसकी सुविधा जिले वासियों को नहीं मिल रहा है. गंभीर बीमारी या दुर्घटना के समय आईसीयू की जरूरत पड़ती है लेकिन सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी अस्पताल से सिर्फ रेफर ही किया जाता है
क्या कहते हैं चिकित्सक
सदर अस्पताल उपाधिक्षक डॉ उमेश प्रसाद ने बताया कि पीकू वार्ड के नाम पर किसी को तैनाती नहीं हुई है जिस कारण यहां इनडोर सुविधा नहीं मिल रहा है. मानव बल कि कमी के कारण चालू नहीं हो रहा.
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