Arwal News: (निशिकांत) शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच अरवल जिले में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. जिले में 19 नवसृजित प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनके पास अब तक न तो अपनी जमीन है और न ही भवन. इन विद्यालयों का संचालन दूसरे स्कूलों में टैग कर किसी तरह किया जा रहा है.
जमीन और भवन की कमी के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है. शिक्षक और छात्र दोनों ही असुविधाजनक परिस्थितियों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है.
करीब 10 हजार बच्चे जमीन पर बैठकर कर रहे पढ़ाई
इन भूमिहीन विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक के करीब 10 हजार बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. हालात यह हैं कि बच्चे जमीन पर बस्ता रखकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और बेहतर भविष्य के सपने देख रहे हैं.
सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम और गुणवत्ता शिक्षा को लेकर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.
कई वर्षों से लंबित है जमीन की मांग
जानकारी के अनुसार, इन विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध कराने को लेकर कई वर्षों से अंचल अधिकारियों (सीओ) को पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है.
अरवल जिले के विभिन्न प्रखंडों—अरवल, कलेर, करपी और कुर्था में कई विद्यालय इस समस्या से प्रभावित हैं.
ये विद्यालय हैं भूमिहीन
भूमिहीन विद्यालयों में मुरादपुर चौकी, बाला बीघा, लेखा विगहा, धोबिनी, हरिजन टोला पारसी, दिलावर डीह, अग्नूर चौकी, देवकुली, लाडउआ, बेलखरी मठिया, भुआपुर, जगमोहन बिगहा, मूडला बिगहा, बाला बाजार, मिल्की टोला झरी बिगहा, सालेपुर हरिजन टोला, आजाद बिगहा, भत्तु बिगहा और सुकन बिगहा सहित कुल 19 नवसृजित प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं.
शिक्षा विभाग ने कई बार की जमीन उपलब्ध कराने की मांग
प्रभारी जिला शिक्षा पदाधिकारी असरफ अली खान ने बताया कि संबंधित अंचल अधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर जमीन उपलब्ध कराने की मांग की गई है. साथ ही प्रत्येक साप्ताहिक बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया जाता है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल पाया है.
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