अरवल : स्वास्थ्य विभाग में पिछले दिनों दवा खरीद के मामले में वित्तीय घपले बाजी की बात सामने आयी थी, जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग की दो सदस्यीय टीम बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय एवं सदर अस्पताल में दवा खरीदारी में बरती गयी अनियमितता को लेकर जांच करने पहुंची. सिविल सर्जन डॉ अरविंद कुमार के द्वारा दवा खरीदारी में अनियमितता को लेकर विभाग से अनुरोध किया गया था. टीम ने सिविल सर्जन कार्यालय और सदर अस्पताल का स्टॉक रूम की जांच की.
दवा खरीदारी में बरती गयी है अनियमितता
अरवल : स्वास्थ्य विभाग में पिछले दिनों दवा खरीद के मामले में वित्तीय घपले बाजी की बात सामने आयी थी, जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग की दो सदस्यीय टीम बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय एवं सदर अस्पताल में दवा खरीदारी में बरती गयी अनियमितता को लेकर जांच करने पहुंची. सिविल सर्जन डॉ अरविंद कुमार के द्वारा […]

जांच टीम में स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख डॉ अशोक कुमार और मुख्य महाप्रबंधक रजनीकांत ने जांच के दौरान दवा खरीदारी में भारी अनियमितता पाई. जांच करने पहुंचे दोनों अधिकारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय और सदर अस्पताल का स्टॉक रूम के साथ कई महत्वपूर्ण जानकारी जुटायी. जांच में पाया गया कि आवश्यकता से ज्यादा दवा मंगवाया गया. जिसकी जरूरत इस जिले में नहीं है फिर भी दवा की खरीदारी की गयी.
जांच टीम ने बताया कि ब्लड शुगर कीट, विक्रिल ( टांका लगाने वाला धागा) मेबेंडाजोल समेत कई दवाओं की खरीदारी अधिक मात्रा में की गयी है. नियमों की अनदेखी कर दवाओं की खरीदारी की गई है. तत्कालीन सिविल सर्जन .स्टोर कीपर और प्रधान लिपिक ने मिल कर दवा खरीदारी की साजिश रची खरीदारी के बाद राशि भुगतान करने से एक दिन पहले ही तत्कालीन सिविल सर्जन का तबादला हो गया.
तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ त्रिवेणी प्रसाद के द्वारा दवा के साथ-साथ ऑपरेशन में प्रयुक्त होने वाले कई सामग्रियों की खरीदारी की गई थी, जिसमें स्टीच धागा की खरीदारी 26 लाख रुपये की की गई जिसकी उपयोगिता नहीं थी. जिसके बाद दवा एवं उपकरण आपूर्ति कराने वाली संस्था के द्वारा बिल बना कर भेजा गया. बिल में राशि देखते ही वर्तमान सिविल सर्जन ने मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी, जिसके बाद पूरा मामला प्रकाश में आया.