अरवल : जमीन नहीं मिलने के कारण खेल भवन और मिनी स्टेडियम निर्माण की योजना फाइलों में ही कैद होकर रह गयी है. फिर भी यहां के खिलाड़ी अपने दम पर बड़ी-बड़ी प्रतियोगिताओं में सफलता अर्जित कर सूबे का नाम रोशन कर रहे हैं.
मेडल जीतने के बाद सरकार इनकी पीठ तो थपथपा रही है, पर खेल संसाधन और आधारभूत संरचना का विकास नहीं हो पाने से खिलाड़ी ठगा महसूस कर रहे हैं. दरअसल, पर्याप्त धन रहने के बाद भी कला और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली कई योजनाओं पर काम शुरू तक नहीं हो पाया है. मुख्यमंत्री खेल विकास योजना से शहर में खेल भवन सह व्यायामशाला निर्माण की योजना भूमि के अभाव में अधर में लटकी हुई है.
खेल भवन के लिए 160 फीट लंबा और 140 फुट चौड़ा भूखंड की जरूरत है, पर जिला प्रशासन ने अब तक भूमि उपलब्ध नहीं करायी है. योजना मद में 6.61 करोड़ रुपये की लागत से ग्राउंड समेत दो मंजिला भवन का निर्माण कराया जाना है. अगर यह भवन बन जाता तो खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संसाधनों की कमी नहीं होती.
व्यायामशाला में कौन-कौन-सी सुविधा होगी उपलब्ध : व्यायामशाला भवन बन जायेगा तो इस भवन के ग्राउंड तल में व्यायामशाला हॉल, मल्टी जिम उपकरण, ट्रेडमिल, वेटलिफ्टिंग 4X4 का प्लेटफॉर्म, महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग ग्रीन रूम, प्रसाधन कक्ष, स्वागत कक्ष एवं जेनरेटर कक्ष की सुविधा होती.
वहीं प्रथम तल पर ताइक्वांडो, कुश्ती, कबड्डी, वुशू समेत मिश्रित खेल कार्यों के लिए हॉल, एक सेट मैट, चेंजिंग कक्ष, प्रसाधन कक्ष, भंडार कक्ष का निर्माण होना है. द्वितीय तल पर जिला खेल अधिकारी का कक्ष, कांफ्रेंस हॉल, योग, एरोविक्स, टेबुल टेनिस, प्रसाधन कक्ष और भंडार कक्ष की सुविधा उपलब्ध होती.
क्या कहते हैं अधिकारी
स्टेडियम निर्माण व व्यायामशाला के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग की गयी है.
विदुर भारती, जिला खेल पदाधिकारी, अरवल
सभी प्रखंडों में बनना है स्टेडियम
जिले के सभी प्रखंडों में स्टेडियम बनना है, लेकिन जमीन के अभाव में दो प्रखंडों का ही चयन हो पाया है और प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है. अरवल प्रखंड के सदर स्थित गांधी मैदान में स्टेडियम के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है.
वहीं करपी प्रखंड के शहरतेलपा हाइस्कूल मैदान में स्टेडियम निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है. जबकि कुर्था, कलेर व वंशी प्रखंड में स्टेडियम के लिए जमीन नहीं मिल पायी है जिसके कारण प्रस्ताव नहीं भेजा गया.
