अरवल : सरकार ने लोगों की स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने के लिए जिला मुख्यालय के सदर अस्पतालों में बेहतर उपकरण लगाये हैं, लेकिन कई रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक भी उपलब्ध नहीं हैं. सदर अस्पताल में चाहकर भी मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना आसान नहीं है. जिले के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों का घोर अभाव है.
हड्डी रोग विशेषज्ञ सहित कई विभागों में नहीं हैं डॉक्टर
अरवल : सरकार ने लोगों की स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने के लिए जिला मुख्यालय के सदर अस्पतालों में बेहतर उपकरण लगाये हैं, लेकिन कई रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक भी उपलब्ध नहीं हैं. सदर अस्पताल में चाहकर भी मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना आसान नहीं है. जिले के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों का घोर […]

जिस वजह से जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है. सरकारी चिकित्सकों की कमी के कारण कई जरूरतमंद लोगों को वह सुविधा नहीं मिल पा रही है, जो लोगों की जरूरत है. वहीं जिले के सबसे बड़े अस्पताल सदर अस्पताल में एक भी हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं. पिछले कई वर्षों से हड्डी रोग विशेषज्ञ की कमी से जिले का सदर अस्पताल जूझ रहा है. अन्य कई विभागों में डॉक्टरों की भारी कमी है.
स्वीकृत पद से काफी कम हैं विशेषज्ञ : सदर अस्पताल में 16 फिजिशियन विशेषज्ञ कार्यरत हैं, जबकि 32 स्वीकृत पद हैं. वहीं जेनरल सर्जन एक भी नहीं हैं. शिशु रोग विशेषज्ञ के लिए एक चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि हड्डी रोग विशेषज्ञ एक भी नहीं हैं, जिससे मरीजों को सही सुविधा नहीं मिल पा रही है. सदर अस्पताल में विशेषज्ञ मनोचिकित्सक का एक पद स्वीकृत है, लेकिन अस्पताल में कोई मनोचिकित्सक पदस्थापित नहीं हैं.
इएनटी, वहां एक भी इस विभाग के चिकित्सक पदस्थापित नहीं हैं. रेडियोलॉजिस्ट विभाग में एक भी चिकित्सक की पदस्थापना नहीं हुई है. वहीं, माइक्रोबायोलॉजिस्ट चिकित्सक के स्वीकृत एक पद के स्थान पर एक भी चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं. पैथोलॉजिस्ट विभाग के लिए दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की जगह मात्र एक चिकित्सक कार्यरत हैं. आयुष चिकित्सकों की जगह एक आयुष चिकित्सक ही कार्यरत हैं.
रेफर कर दिये जाते हैं सड़क दुर्घटना के शिकार मरीज : सदर अस्पताल में एक साल से किसी महिला चिकित्सक व हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति नहीं हो सकी है. इस कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है. हर दिन दुर्घटना के शिकार मरीज इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचते हैं. ऐसे में हल्की चोट आने पर भी रोगी को अस्पताल से रेफर कर दिया जाता है. वहीं महिला चिकित्सक के नहीं रहने के कारण रोगियों को परेशानी उठानी पड़ रही है.