करपी (अरवल) : गांव-गांव में खुले में शौच से मुक्ति के लिए जोर -शोर से अभियान चलाया जा रहा है. वहीं प्रधानमंत्री स्वच्छता मिशन के तहत प्रत्येक स्कूल में भी शौचालय निर्माण योजना चल रही है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चे आज भी खुले में शौच जाने को विवश हैं.
ऐसे में प्रखंड को खुले में शौच से मुक्त बनाने का सपना कैसे साकार होगा. लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत प्रत्येक पंचायत के वार्डों को जल्द से जल्द ओडीएफ करने के लिए जिला प्रशासन क्या प्रयासरत है, लेकिन इन अधिकारियों का ध्यान शायद आंगनबाड़ी केंद्रों पर पड़ने वाले छोटे -छोटे बच्चों की ओर नहीं जा रहा है.
प्रखंड क्षेत्र में 165 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है. इनमें से एक भी केंद्र पर आज तक शौचालय नहीं बना है. इन केंद्रों में से अधिकतर केंद्रों पर पानी पीने के लिए चापाकल तक नहीं लगाया गया है. किसी केंद्र पर बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी है.
165 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 43 केंद्रों का ही अपना भवन है. 122 केंद्र किराये के मकान में चल रहे हैं तो कई सामुदायिक या अन्य सरकारी भवनों में संचालित हो रहे हैं. किराये के भवन या सरकारी भवन में चल रहे. इनमें से 13 केंद्रों पर ही शौचालय की व्यवस्था है. इसके अलावा तमाम केंद्र के बच्चे खुले में शौच करने को विवश हैं.
अधिकतर आंंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे खुले में शौच करने को विवश
अधिकतर केंद्रों पर पानी पीने के लिए चापाकल तक नहीं
क्या कहते हैं अधिकारी
प्रखंड क्षेत्र में 165 केंद्र संचालित हैं. मात्र 13 केंद्रों पर ही शौचालय की व्यवस्था है. 122 केंद्रों का अपना भवन तक नहीं है. कई केंद्रों पर पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है. ऐसे में केंद्र पर पढ़ने वाले बच्चे को खुले में शौच करना मजबूरी है. इसके लिए वरीय पदाधिकारी को लिखा गया है.
शिखा सिन्हा, सीडीपीओ, करपी
