अरवल : जिले में सड़क दुर्घटना में बेतहाशा वृद्धि हो रही है. अप्रैल में अब तक जिले में अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में आधा दर्जन से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गये और छह लोगों की मौत भी हो चुकी है, जो लोगों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है.
आये दिन वाहन चालकों द्वारा यातायात के नियमों की धज्जियां उड़ायी जाती हैं. इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. वाहनों में अप्रत्याशित वृद्धि व यातायात के नियमों का कड़ाई से पालन नहीं होना, इसकी मुख्य वजह बनती रही है. बेलगाम ट्रक चालकों की मनमानी व गाड़ियों की तेज रफ्तार के कारण दुर्घटनाएं आम हो गयी हैं.
बड़े वाहनों के प्रवेश का जो समय निर्धारित है, उसका कड़ाई से पालन नहीं होना व गाड़ियों की स्पीड पर नियंत्रण के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाना हादसों का एक बड़ा कारण है. सड़क सुरक्षा सप्ताह के समय को यातायात के नियमों का पालन करने का निर्देश प्रशासन की ओर से दिया जाता है. जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है, फिर भी स्थिति यथावत है.
तेज रफ्तार के कारण हुईं मौतें, बड़े वाहनों का बाजार में यातायात के नियम के विरुद्ध प्रवेश आम हो गयी है. नो इंट्री के समय भारी वाहनों का आवागमन होता रहता है. बाजार में वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस नियम कानून नहीं है, जिस कारण कई बार ट्रक की चपेट में आकर लोग दुर्घटनाग्रस्त होकर मौत के मुंह में जा चुके है.
बीते दिनों 7 अप्रैल को अरवल -सहार पुल पर बैदराबाद के व्यवसायी दुर्गा कुमार व मनीष कुमार की मौत सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी. 17 अप्रैल को समाहरणालय कर्मी प्रवीण कुमार एनएच 110 पर रोजापर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गये. उनका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है.
18 अप्रैल को औरंगाबाद जिले के रतनपुर के रंजन कुमार बेलखरा के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गये. 20 अप्रैल को अलग -अलग सड़क दुर्घटना में तीन लोगों की जानें चली गयीं. इनमें प्रसादी इंग्लिश में एनएच 139 पर एक व्यक्ति कोनिका निवासी बुद्ध मांझी और अगनुर के पास फेकू बिगहा के दो लोगों सुजीत कुमार और रंजय सिह की मौत हो गयी.
22 अप्रैल को अधेड़ की मौत उमैराबाद के पास हो गई. 70 वर्षीय वृद्ध रामलखन यादव टहल रहे थे, तभी पीछे से अज्ञात वाहन ने ठोकर मार दी. वहीं मंगलवार को भी नहरपर वाली सड़क पर हुई दुर्घटना में सात लोग जख्मी हो गये हैं.
यातायात के नियमों की उड़ रहीं धज्जियां : यातायात के नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो रहा है. वाहनों के गति नियंत्रण पर कोई लगाम नहीं होने से वाहन चालक भीड़-भार वाले क्षेत्र में भी वाहन की गति सीमा कम नहीं करते हैं, जिससे आये दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं. ओवरलोडेड गाड़ियों के प्रवेश से भी दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है.
ट्रैफिक पुलिस की भी नहीं है व्यवस्था, जो यातायात के नियमों का कड़ाई से पालन करवा सके. ट्रैफिक पुलिस के नहीं होने से कई बार वाहन चालक यातायात के नियमों को तोड़ते हैं. मुख्य चौराहे पर पुलिस तो रहती है, बावजूद कई बार भारी वाहनों के गलत ढंग से प्रवेश के कारण जाम की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है.
