ईंट भट्ठों पर खुल रही स्वच्छता अभियान की पोल

करपी (अरवल) : एक तरफ सरकार स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ ईंट भट्ठों पर किसी आलाधिकारी एवं भट्ठा मालिकों का ध्यान नहीं जा रहा है. स्वच्छ भारत एवं स्वस्थ भारत बनाने के नारों के साथ पूरा सरकारी महकमा लगा हुआ है. प्रतिदिन बिहार का कोई […]

करपी (अरवल) : एक तरफ सरकार स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ ईंट भट्ठों पर किसी आलाधिकारी एवं भट्ठा मालिकों का ध्यान नहीं जा रहा है. स्वच्छ भारत एवं स्वस्थ भारत बनाने के नारों के साथ पूरा सरकारी महकमा लगा हुआ है.

प्रतिदिन बिहार का कोई न कोई वार्ड ओडीएफ घोषित हो रहा है लेकिन वहीं दूसरी तरफ ईंट उद्योगों पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है. मानो ईंट उद्योग किसी वार्ड में नहीं आता है. प्रत्येक ईंट उद्योग पर मजदूर समेत लगभग 50 से अधिक व्यक्ति रहते हैं, जो खुले में शौच करने को मजबूर हैं लेकिन किसी सरकारी महकमे के द्वारा इन मजदूरों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
पूरे प्रखंड की बात तो दूर प्रखंड मुख्यालय से महज 3 -4 किलोमीटर की दूरी पर आधा दर्जन से अधिक ईंट भट्ठा संचालित हो रहे हैं. इस पर लगभग काम करने वाले अधिकांश मजदूर झारखंड के होते हैं, जिनके लिए मालिकों के द्वारा बनाये गये आवास की ऊंचाई अधिकतम चार फुट होती है. इसमें कोई व्यक्ति खड़ा भी नहीं हो सकता.
गरीबी की मार झेल रहे परिवारों के लिए एक सामूहिक शौचालय भी उद्योग मालिक के द्वारा नहीं बनाया जा सकता जबकि पल्स पोलियो टीकाकरण के दिन पोलियोरोधी खुराक पिलाने जाते हैं, लेकिन शौचालय में शौच करने के लिए प्रेरित करने वाला है न कोई पदाधिकारी और न ही भट्ठा मालिक शौचालय निर्माण में दिलचस्पी लेता है.
शौचालय निर्माण करने के लिए ईंट उद्योग मालिक चाहे तो अपने अपने उद्योगों पर आधे दर्जन शौचालय निर्माण कार्य में जरूर सक्षम हैं, क्योंकि शौचालय निर्माण के लिए इन उद्योगों पर पूर्ण व्यवस्था उपलब्ध रहती है. इसके बावजूद शौचालय निर्माण के नहीं कराया जा रहा है और तो और शौचालय निर्माण के लिए इनको जागरूक भी नहीं किया जा रहा है.
गरीब मजदूर खुले में शौच करने को मजबूर हैं. यदि ऐसे गरीब लोग खुले में शौच करेंगे तो स्वच्छ भारत और स्वस्थ भारत का सपना कभी पूरा होता संभव नहीं दिखता, इसलिए संबंधित अधिकारियों सहित भट्ठा मालिक को शौचालय निर्माण के लिए जागरूक हो कर प्रत्येक भट्ठों पर शौचालय निर्माण कराना जरूरी प्रतीत हो रहा है.

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