अरवल : चैत्र मासिक पर्व मेष संक्रांति सतुआनी विशुआ 14 अप्रैल को हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी. लोग स्नान पूजन कर दान पुण्य कर दोपहर में सतुआ गुड़, कच्चे आम के फरुआ के साथ खाया. सूर्य के मकर राशि से मेष राशि में पहुंचने के उपलक्ष्य में यह लोक पर्व मनाया जाता है.
किसान विशेष रूप से इस त्योहार को मनाते हैं. इस त्योहार के पीछे अन्य कई धार्मिक मान्यताएं भी निहित हैं. इस दिन चूल्हे की पूजा भी की जाती है. सतुआनी के दिन खरमास समाप्त हो जाता है.
इसके साथ ही शादी-विवाह समेत सभी मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं. इस पर्व को सतुआनी के अलावा सत्तू संक्रांति और विशुआ भी कहा जाता है. इस दिन प्रत्यक्ष देवता सूर्य की पूजा की जाती है. वहीं सत्तू, गुड़, चना, पंखा, मिट्टी का घड़ा, आम, ऋतुफल, अन्न आदि दान करने की परंपरा है.
