बिहार में शराबबंदी के बाद गांजा की बढ़ी मांग, नशे के कारोबारियों की मौज

अरवल : एक तरफ जहां शराबबंदी कर सरकार बिहार को नशा मुक्त राज्य बनाने में लगी है. वहीं, दूसरी ओर नशा के कारोबारी व नशेड़ी इस मुहिम को लगातार झटका दे रहा है. शराबबंदी के बाद जब खुलेआम शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा. तो, अब जिले में गांजा का डिमांड बढ़ […]

अरवल : एक तरफ जहां शराबबंदी कर सरकार बिहार को नशा मुक्त राज्य बनाने में लगी है. वहीं, दूसरी ओर नशा के कारोबारी व नशेड़ी इस मुहिम को लगातार झटका दे रहा है. शराबबंदी के बाद जब खुलेआम शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा. तो, अब जिले में गांजा का डिमांड बढ़ गया है. गांजासेवन करने वालों की संख्या को देखते हुए इसकी तस्करी भी बढ़ी है. शराबबंदी के बाद मादक पदार्थ गांजा की बिक्री को मानों पंख लग गया है.

शहर से लेकर गांव व मुहल्लों में धड़ल्ले से गांजा की बिक्री हो रही है. चाय-पान की दुकान के साथ ही किराना दुकान व साइकिल से होम डिलिवरी तक की व्यवस्था होने लगी है. नशा के लिए लोग बड़े पैमाने पर गांजा का सेवन कर रहे हैं. इस कारण इसका डिमांड भी काफी बढ़ गया है. जिले के कोई ऐसे गांव नहीं है जहां गांजा के विक्रेता या पीने वाले नहीं हैं. इसके साथ ही सुलेसन, भांग आदि मादक पदार्थों का सेवन भी युवा वर्ग धड़ल्ले से कर रहे हैं. इन सभी नशा की वस्तु खुलेआम बिक्री के बावजूद पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है. सूत्रों के अनुसार नशा करोबारी स्थानीय पुलिस से मिल कर इस धंधा में चांदी काट रहे हैं. जिससे समाज के सभय लोगों में काफी आक्रोश हैं.

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