उद्देश्य से भटक गया नशामुक्ति केंद्र

चिंताजनक. रिक्त पड़े हैं सदर अस्पताल में बने नशा मुक्ति केंद्र के सभी बिस्तर 533 आदतन शराबियों की हुई काउंसेलिंग 00 00 00 00 00 00 00 00 अरवल : सदर अस्पताल में स्थापित नशामुक्ति केंद्र को जिस उद्देश्य के लिए खोला गया था, उस उद्देश्य से अभी कोसों दूर है. कुछ लोगों को छोड़ […]

चिंताजनक. रिक्त पड़े हैं सदर अस्पताल में बने नशा मुक्ति केंद्र के सभी बिस्तर

533 आदतन शराबियों की हुई काउंसेलिंग
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अरवल : सदर अस्पताल में स्थापित नशामुक्ति केंद्र को जिस उद्देश्य के लिए खोला गया था, उस उद्देश्य से अभी कोसों दूर है. कुछ लोगों को छोड़ इस केंद्र की ओर अधिसंख्य शराबियों ने जाना मुनासिब नहीं समझा. मालूम हो कि बिहार में नयी शराब नीति लागू होने के बाद शराब सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद आदतन शराब पीने वाले व्यक्तियों में शराब का सेवन नहीं करने के फलस्वरूप कुछ लक्षण पाये जाते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और तत्परता से इलाज नहीं कराने पर व्यक्ति की मौत भी हो सकती है. इसके उपचार के लिए सरकार द्वारा सभी जिलों के सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की गयी ताकि शराब के जद में आये लोगों को बेहतर सुविधा और इलाज के माध्यम से शराब की लत को छुड़ाया जा सके.
इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से जिले क्षेत्र में प्रचार-प्रसार के लिए अभियान भी चलाया गया. उक्त केंद्र की स्थापना सदर अस्पताल में मार्च, 2016 में की गयी थी. स्थापना काल से अब तक जिले क्षेत्र के सात लोगों का इस केंद्र में इलाज चलाया गया. इलाज का कोर्स पूरा होने के बाद लोगों को छुट्टी दी गयी. इसके बाद केंद्र की नियमावली के अनुकूल भौतिक सत्यापन भी किया गया. सात में से छह लोगों का भौतिक सत्यापन भी किया गया. एक व्यक्ति का अन्य प्रदेश में रहने के कारण भौतिक सत्यापन नहीं हो सका. भौतिक सत्यापन में अादतन शराबी मरीजों की हालत बेहतर पायी गयी. एक मरीज को अन्य प्रदेशों में रहने के कारण भौतिक सत्यापन नहीं किया जा सका. इसकी जानकारी नशा मुक्ति केंद्र के प्रभारी ने दी.
मरीजों के लिए हर तरह की सुविधा उपलब्ध
केंद्र में प्रशिक्षित चिकित्सक एवं परामर्शी द्वारा उपचार सभी प्रकार की आवश्यक दवाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराने, रोगियों को नशामुक्ति केंद्र ले जाने एवं रेफरल के लिए नि:शुल्क एंबुलेंस सेवा भर्ती रोगियों के लिए नि:शुल्क भोजन रोगियों के रहने के लिए पूर्ण वातानुकूलित वार्ड पेयजल के लिए आरओ की व्यवस्था, साफ एवं स्वच्छ शौचालय साफ एवं नयी चादरें रोगियों के मनोरंजन के लिए टेलीविजन, समाचार पत्र और क्रीड़ा के लिए अन्य सामग्री उपलब्ध करायी जाती हैं.
ओपीडी के माध्यम से 505 का हुआ इलाज
अादतन शराबियों से 10 प्रश्नों का उत्तर चिकित्सकों व परामर्शी द्वारा लिया जाता है. इसका अधिकतम मूल्यांक 40 रखा गया है. जिसमें 19 से ऊपर अंक पाया जाता है, उसे इंदौर में भर्ती कराने का प्रावधान है. अब तक 533 लोगों का भिन्न-भिन्न प्रकार के अलकोहल सेवन के कारण उत्पन्न कठिनाइयों के लिए काउंसेलिंग की गयी. वहीं, 505 का ओपीडी के माध्यम से परामर्श व इलाज किया गया. 19 से ऊपर अंक वाले सात मरीजों को अब तक इस केंद्र का लाभ मिला है.
नशा मुक्ति केंद्र के बदले शराबी भेजे जा रहे जेल
सरकार द्वारा लाये गये शराब अधिनियम के तहत जिला क्षेत्र के भिन्न-भिन्न भाग से नशे में सराबोर दर्जनों व्यक्तियों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है. लेकिन उन्हें नशा मुक्ति केंद्र के बजाय जेल भेजा गया है. ऐसे व्यक्तियों को यदि नशा मुक्ति केंद्र में इलाज का कोर्स पूरा कर जेल भेजा जाता तो कुछ हद तक नशा मुक्ति केंद्र के अभियान को बल मिलता लेकिन नयी शराब नीति के कारण कानून का पालन करना पुलिस के सामने भी एक बहुत बड़ी चुनौती है. इसी कारणवश नशा मुक्ति केंद्र के सभी बिस्तर रिक्त पड़े हुए हैं. नशामुक्ति केंद्र के प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि सरकार द्वारा अादतन शराबी, जो इस लत से दूर होना चाहते हैं, उनका इलाज इस केंद्र में मुफ्त में किया जाता है. साथ ही उनके दैनिक उपयोग की वस्तुएं और खाना नाश्ता भी मुफ्त में दिया जाता है.

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