Veer Kunwar Singh University : आरा शहर का गौरव माने जाने वाला वीर कुंवर सिंह मैदान इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है. जिस मैदान को लोगों की सुविधा और शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर सजाया गया था, वही आज मवेशियों का चारागाह बनकर रह गया है. हालत यह है कि मैदान में हर समय पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है और पूरे परिसर की सुंदरता पर दाग लग रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री आर के सिंह की पहल पर इस मैदान का भव्य सौंदर्यीकरण कराया गया था, ताकि शहरवासियों को बेहतर सुविधा मिल सके. लेकिन पशुपालकों की मनमानी और प्रशासन की लापरवाही के कारण सारी मेहनत बेकार होती दिख रही है.
Arrah News : गेट तोड़कर मैदान में घुसाए जा रहे मवेशी
मैदान को सुरक्षित रखने के लिए चारों तरफ गेट लगाए गए थे. इन गेटों की बनावट ऐसी थी कि आम लोग आसानी से आ-जा सकें, लेकिन पशुओं का प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके. शुरुआत में यह व्यवस्था कारगर भी रही, लेकिन बाद में असामाजिक तत्वों ने इसे नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया.
बताया जाता है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर एक तरफ का गेट तोड़ दिया. इसके बाद महावीर मंदिर और स्टेडियम के पास लगाए गए गेट को भी नुकसान पहुंचाया गया. अब स्थिति यह है कि खुलेआम मवेशियों को मैदान में छोड़ दिया जाता है, जिससे घास और अन्य संरचनाओं को भारी नुकसान हो रहा है.
बार-बार एक ही जगह पर तोड़ा जाता है गेट
यह पहली बार नहीं है जब मैदान के गेट को तोड़ा गया है. इससे पहले भी कई बार इसी स्थान पर गेट तोड़ने की घटना सामने आ चुकी है. स्थानीय लोगों के अनुसार आरा विधायक अमरेंद्र प्रताप सिंह ने भी यहां टहलने के लिए सड़क और गेट की व्यवस्था कराई थी, लेकिन उस समय भी कुछ लोगों ने उसे क्षतिग्रस्त कर दिया था.
अब फिर से वही हालात बन गए हैं. बार-बार गेट टूटने के बावजूद न तो इसकी स्थायी मरम्मत हो रही है और न ही दोषियों पर कोई कार्रवाई की जा रही है.
विकास की बात करने वाले भी चुप
लोगों का कहना है कि शहर में कई ऐसे लोग हैं जो विकास नहीं होने का आरोप लगाते रहते हैं. लेकिन जब कोई अच्छा काम होता है, तो उसे बचाने के लिए आगे नहीं आते. वीर कुंवर सिंह मैदान इसका ताजा उदाहरण बन गया है.
निर्माण एजेंसी एनटीपीसी की भी उदासीनता सामने आ रही है. मैदान के रखरखाव को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है.
विश्वस्तरीय सुविधाओं का सपना अधूरा
इस मैदान को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की योजना बनाई गई थी. यहां आकर्षक लाइटिंग, रनिंग ट्रैक, वॉकिंग ट्रैक, ओपन जिम, बच्चों के खेलने की जगह, बैठने के लिए बेंच, आधुनिक शौचालय, पेयजल और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था जैसी कई सुविधाएं प्रस्तावित थीं.
सौंदर्यीकरण का काम पांच जोन में बांटा गया था, जिसमें अलग-अलग सुविधाओं का विकास होना था. कुछ काम जरूर पूरे हुए, लेकिन अब पूरा प्रोजेक्ट ठप पड़ता नजर आ रहा है.
यदि जल्द ही प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सक्रिय नहीं हुईं, तो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया यह मैदान पूरी तरह बर्बाद हो सकता है. शहरवासियों ने मांग की है कि गेट की मरम्मत कराई जाए, मवेशियों के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो, ताकि इस मैदान की खोई हुई पहचान फिर से वापस आ सके.
