जन संस्कृति मंच भोजपुर का दूसरा जिला सम्मेलन संपन्न, 33 सदस्यीय नयी कमिटी का हुआ गठन

जन संस्कृति मंच (जसम), भोजपुर का दूसरा जिला सम्मेलन रवि रंजन राकेश के नाम पर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. इसमें शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई और 33 सदस्यों की नई जिला कमेटी का गठन किया गया.

Jan Sanskriti Manch: स्थानीय अनंत कुमार सिंह सभागार (रेडक्रॉस सोसाइटी सभागार) में जन संस्कृति मंच (जसम), भोजपुर का दूसरा जिला सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. मंच का नाम दिवंगत रंगकर्मी रवि रंजन राकेश के नाम पर रखा गया था. सम्मेलन में शिक्षा, संस्कृति, अभिव्यक्ति और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई.

शिक्षा और संस्कृति पर शासक वर्ग की नीतियों पर सवाल

सम्मेलन में दिल्ली से आये मुख्य वक्ता प्रो. गोपाल प्रधान ने ‘शिक्षा, संस्कृति और अभिव्यक्ति की चुनौतियाँ’ विषय पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भारत की जन संस्कृति पर शासक वर्ग अपनी संस्कृति थोप रहा है. शासक वर्ग शोषण के नये औजारों के साथ हमले कर रहा है और जातिगत-सामाजिक भेदभाव, लिंग-भेद, रंग-भेद आदि को बरकरार रखने की कोशिशों में लगा हुआ है.

उन्होंने कहा कि शिक्षण क्षेत्रों को धड़ल्ले से निजी हाथों में देकर दलित-पिछड़े और गरीब लोगों को शिक्षा से वंचित करने की साजिशें रची जा रही हैं. आम जनता के पिछड़ेपन का भरपूर लाभ उठाया जा रहा है. ऐसी परिस्थितियों के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाकर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है. ऐसे में सृजनात्मक प्रतिरोध विकसित करना होगा. लेखकों और कलाकारों को अपनी कलात्मकता के साथ एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ना होगा.

उद्घाटन सत्र में साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों ने रखी बात

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) की ओर से प्रो. मृत्युंजय सिंह, प्रो. रवींद्रनाथ राय और डॉ. लक्ष्मी कुमारी, जनवादी लेखक संघ (जलेस) की ओर से कवि राजाराम प्रियदर्शी, जसम की ओर से कथाकार सुरेश कांटक तथा अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से प्रो. बलराज ठाकुर ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया. सभी ने सम्मेलन की सफलता के लिए बधाई दी.

आरंभ में जसम भोजपुर के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने आगत अतिथियों और सदस्यों का स्वागत किया.

हम होंगे कामयाब एक दिन गीत सम्मेलन का हुआ समापन

तीन पुस्तकों का हुआ विमोचन

दूसरे सत्र में सुरेश कांटक के हिंदी कहानी संग्रह ‘मृत्युद्वार के पहरुए’ तथा भोजपुरी कवि-गीतकार आसिफ रोहतासवी के दो कविता-गीत संग्रहों ‘कबीर ना भइनीं त का’ और ‘गीत कइसे गुनगुनाईं’ का विमोचन हुआ.

प्रो. मृत्युंजय सिंह ने सुरेश कांटक के कहानी संग्रह पर अपनी बात रखते हुए पुस्तक संस्कृति और वर्तमान स्थिति पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि लिख देने भर से कोई सांस्कृतिक बदलाव संभव नहीं है, जब तक कि उसे अपनी जरूरत की तरह पढ़ा न जाए.

इस अवसर पर कवि-आलोचक जितेंद्र कुमार ने आसिफ रोहतासवी की लोकार्पित पुस्तकों पर अपने विचार रखे. इस सत्र का संचालन सुधीर सुमन ने किया.

33 सदस्यों की नयी जिला कमिटी गठित

सांगठनिक सत्र में जसम के राज्य सचिव दीपक सिन्हा पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे. उनके साथ बेगूसराय से ललित विजय और पटना जसम से पुनीत पाठक भी मौजूद रहे. उनकी देखरेख में नयी कमिटी का गठन किया गया.

कवि-आलोचक जितेंद्र कुमार को पुन: अध्यक्ष और कवि सुमन कुमार सिंह को सचिव की जिम्मेदारी दी गयी. इस बार जसम भोजपुर की कुल 33 सदस्यों की नयी टीम बनायी गयी, जिसमें कुछ नये सदस्यों को भी जोड़ा गया.

बड़ी संख्या में साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद

सम्मेलन में कवि अरुण शीतांश, ओम प्रकाश मिश्र, जनार्दन मिश्र, प्रो. अयोध्या प्रसाद उपाध्याय, कथाकार अखिलेश कुमार, रंगकर्मी सुनील सरीन, इश्तेयाक, शमशाद प्रेम, धनंजय सिंह, अमित मेहता, सूर्यप्रकाश, आलोक, विक्रांत, धनंजय कटकेरा, सिद्धनाथ सागर, रामयश अविकल, रविप्रकाश सूरज, आशुतोष पांडेय, सुनील श्रीवास्तव, कृष्ण कुमार निर्मोही, जितेंद्र विद्रोही, सुनील चौधरी, अरुण प्रसाद, अनिल वर्मा, कमल किशोर, संजय कुमार, सत्यदेव कुमार, रणधीर राणा, माले जिला सचिव अभ्युदय, माले नेता क्यामुद्दीन, बब्लू गुप्ता, पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन, हरिनाथ राम, चंदन, बृजनंदनजी, विमल यादव, कर्मचारी नेता यदुनंदन चौधरी, प्रो. नथुनी पांडे, विजय मेहता, नीलेश कुमार आदि उपस्थित रहे.

जनगीतों के साथ सम्मेलन का हुआ समापन

अंत में रंगकर्मी राजू रंजन, निर्मोहीजी, धनंजय सिंह और साथियों ने जनगीतों की प्रस्तुति दी. इसके साथ सम्मेलन का समापन हुआ. सभागार में राकेश कुमार दिवाकर की पेंटिंग और भोजपुर के कवियों की कविताओं के पोस्टर भी लगाए गये थे.

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By Prabhat khabar news desk

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