भगवान महावीर मार्ग, जेल रोड स्थित श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर में आचार्य श्री सुलभ सागर जी महाराज ससंघ के परम सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य रवि कीर्ति शास्त्री के मंगल निर्देशन में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन सिद्ध परमेष्ठी के 256 गुणों की आराधना की गई.
मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन ने बताया कि प्रातः काल में भगवान जिनेंद्र प्रभु का भक्तिपूर्वक अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा संपन्न की गई. तत्पश्चात देव-शास्त्र-गुरु पूजा, श्री पार्श्वनाथ पूजा, श्री पंचमेरु पूजा और श्री नंदीश्वर द्वीप पूजा के बाद श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का शुभारंभ हुआ.
इंद्र-इंद्राणियों और श्रावकों ने अर्पित किए 256 श्रीफल व अर्घ्य
सौधर्म इंद्र-इंद्राणी उर्मिला-सुनील जैन, कुबेर सपना-अनीश जैन, ईशान उषा-आलोक जैन और मैना सुंदरी के रूप में मंजुला-आदेश जैन के साथ सभी इंद्र-इंद्राणियों व श्रावकों ने भावपूर्वक विधान मंडल पर 256 श्रीफल, ध्वज एवं अर्घ्य समर्पित किए.
सिद्धों की भक्ति से होता है असीम पुण्य का संचय: आचार्य सुलभ सागर
आचार्य श्री सुलभ सागर जी महाराज ने उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि श्री सिद्धचक्र विधान अनंतानंत सिद्ध प्रभु की भक्ति के निमित्त किया जाने वाला वृहत विधान है. इस विधान में सिद्धों के अष्ट गुणों, सोलह कारण, चौंसठ ऋद्धियों, जिनगुण संपत्ति, कर्मदहन, पंचपरमेष्ठी आदि के अर्घ्य के साथ सहस्त्रनामावली द्वारा अनंतानंत सिद्धात्माओं के अर्घ्य प्रदान किए जाते हैं.
उन्होंने बताया कि श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान जैन धर्म का सबसे शक्तिशाली और फलदायी अनुष्ठान माना जाता है, जो आत्मा की शुद्धि के साथ-साथ सांसारिक और पारमार्थिक दोनों प्रकार के सुख प्रदान करता है. अष्टान्हिका महापर्व के दौरान शुद्ध भावों से सिद्धों की भक्ति करने से असीम पुण्य का संचय होता है.
संध्याकालीन कार्यक्रम में हुई महाआरती और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
संध्याकालीन कार्यक्रम में महाआरती, भजन, गुरुभक्ति, प्रश्नमंच एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया.
आयोजन को सफल बनाने में चातुर्मास समिति के डॉ. शशांक जैन, रीना जैन, अजय जैन (बबलू जी), मनीष जैन, साहू जैन, रोहित जैन, ओंकार अग्रवाल, अलका जैन, ब्र. सुलोचना दीदी, रत्ना जैन, ज्योति जैन, जूही जैन, हर्षित जैन, अतिशय जैन, वंश जैन, आकाश जैन और मन्नू जैन के साथ सैकड़ों की संख्या में गुरुभक्तों की भूमिका अहम रही.
