Bihar flood: गंगा एवं सहायक नदियों के जल स्तर में लगातार वृद्धि के कारण शाहपुर प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति और विकराल होती जा रही है. प्रखंड का 80 प्रतिशत से अधिक भूभाग जलमग्न हो चुका है. यातायात के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई है. नावों के माध्यम से लोग और दैनिक जरूरत का सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच रहे हैं. वहीं हजारों लोग और मवेशी विस्थापित होकर शरण स्थलों पर रहने को मजबूर हैं. प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है.
18 स्थानों पर चल रही सामुदायिक रसोई
प्रशासन की ओर से विस्थापित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है. अंचल अधिकारी आनंद प्रकाश ने बताया कि प्रखंड क्षेत्र में अब तक कुल 18 सामुदायिक रसोई चलायी जा रही हैं. इसके साथ ही सरकारी स्तर पर विभिन्न पंचायतों और रूटों पर करीब 160 नावों का परिचालन किया जा रहा है.
नावों के परिचालन और राहत व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग अंचल अधिकारी आनंद प्रकाश, बीडीओ शत्रुंजय कुमार सिंह एवं एआरओ रश्मि सागर के माध्यम से की जा रही है.
डीडीसी ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ की बैठक
प्रखंड कार्यालय में उप विकास आयुक्त अरुण प्रकाश ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर बाढ़ के हालात की समीक्षा की. बैठक में जनप्रतिनिधियों ने पशुओं के लिए चारा वितरण बढ़ाने, मेडिकल टीमों की संख्या बढ़ाने और अधिक मात्रा में पॉलीथिन सीट उपलब्ध कराने की मांग की. इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी सामुदायिक रसोई शुरू कराने की मांग रखी गयी.
दो दर्जन गांवों की बिजली आपूर्ति बंद
बाढ़ को देखते हुए विद्युत विभाग ने एहतियात के तौर पर करीब दो दर्जन गांवों की विद्युत आपूर्ति बंद कर दी है. इससे इन इलाकों में पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गयी है. बाढ़ का पानी घरों में घुसने के कारण चापाकलों का पानी भी प्रदूषित हो गया है. ऐसे में लोग बोतलबंद पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं.
तटबंध पर सैकड़ों मवेशियों ने लिया शरण
माधोपुर और दामोदरपुर के समीप तटबंध पर सैकड़ों की संख्या में मवेशियों ने शरण ले रखी है. सरकारी स्तर से उपलब्ध कराया जा रहा पशु चारा पर्याप्त नहीं होने की बात सामने आ रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार मवेशियों की संख्या अधिक होने के कारण उपलब्ध चारा कम पड़ रहा है.
कृषि उत्पाद संगठन खांटी एग्रो के निदेशक उमेश चंद्र पांडे ने कहा कि प्रशासन को तटबंधों एवं अन्य स्थानों पर पशुओं के लिए अधिक मात्रा में चारा उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि बाढ़ के बीच मवेशियों को पर्याप्त चारा मिल सके.
धान, खरीफ और सब्जियों की खेती को भारी नुकसान
बाढ़ के कारण शाहपुर प्रखंड क्षेत्र में कृषि को भी भारी नुकसान पहुंचा है. करीब 80 प्रतिशत धान, खरीफ एवं सब्जियों की खेती पूरी तरह नष्ट होने की बात कही जा रही है. इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.
