14 साल बाद फिर बनेगा ऐसा संयोग, आरा में तीसरी सोमवारी और नाग पंचमी पर शिवालयों में उमड़ी आस्था

Arrah 3rd Somwari and Nag Panchami : सावन की तीसरी सोमवारी पर आरा में नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग देखने को मिला. शिवालयों में भक्तों की कतारें लगी रहीं, जहाँ उन्होंने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और नाग देवता की पूजा-अर्चना की. यह पर्व 14 साल बाद ऐसा संयोग लेकर आया है.

Arrah 3rd Somwari and Nag Panchami : आरा में सावन की तीसरी सोमवारी पर इस बार धार्मिक उत्साह के साथ सोमवारी और नाग पंचमी का संयोग भी देखने को मिला. सुबह से ही शहर और आसपास के शिवालयों में श्रद्धालुओं की कतार लगी रही. हर-हर महादेव और ओम नमः शिवाय के जयघोष से वातावरण शिवमय बना रहा. भक्तों ने जलाभिषेक के साथ रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और नाग देवता की पूजा-अर्चना की.

सुबह से शिवालयों में लगी भक्तों की कतार

सावन की तीसरी सोमवारी पर सुबह स्नान और पूजा की तैयारी के बाद श्रद्धालु मंदिरों की ओर निकल पड़े. हाथों में पूजा की थाली और शिव पूजन की सामग्री लेकर महिला और पुरुष भक्त मंदिरों में पहुंचे. सुबह से ही विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की कतार लग गई.

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वैदिक मंत्रों और घंटियों से गूंजा वातावरण

शिवालयों में वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया. श्रद्धालु भगवान शिव का स्मरण करते हुए "ओम नमः शिवाय" का जाप करते रहे. जगह-जगह "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयकारे भी सुनाई देते रहे.

तीन तरह से बाबा की भक्ति में जुटे श्रद्धालु

आरा और भोजपुर के श्रद्धालु अपनी-अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार भगवान शिव की पूजा कर रहे हैं. कुछ भक्त देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर रवाना हुए, जबकि कुछ रोहतास जिले के गुप्ताधाम में पूजा के लिए पहुंचे. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने गांव और शहर के शिव मंदिरों में ही जलाभिषेक कर आराधना की.

देवघर और गुप्ताधाम जा रहे शिवभक्त

सावन की सोमवारी पर कई श्रद्धालु बाबा धाम में पूजा-अर्चना के लिए देवघर जा रहे हैं. वहीं कुछ श्रद्धालु वाहनों से गुप्ताधाम पहुंचकर भगवान शिव की पूजा करने की तैयारी में हैं. स्थानीय शिवालयों में पूजा करने वाले भक्त अपने परिवार के साथ-साथ विश्वकल्याण की भी कामना कर रहे हैं.

कई मंदिरों में हुआ जलाभिषेक

तीसरी सोमवारी को आरा के विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया. सड़क पर पूजा की थाली लेकर मंदिरों की ओर जातीं महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु दिखाई दिए. सावन के माहौल में शहर और आसपास के इलाकों की धार्मिक छटा देखते ही बन रही थी.

मंदिरों में किए गए विशेष इंतजाम

सोमवारी पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए कई मंदिरों में व्यवस्थापकों और पुजारियों की ओर से विशेष इंतजाम किए गए. श्रद्धालुओं को पूजा और जलाभिषेक में परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर स्तर पर व्यवस्थाएं की गईं. बड़ी संख्या में भक्तों ने इन व्यवस्थाओं के बीच भगवान शिव की पूजा की.

कहीं रुद्राभिषेक तो कहीं महामृत्युंजय जाप

सावन की सोमवारी पर घरों के साथ मंदिरों में भी विशेष अनुष्ठान किए गए. कई श्रद्धालुओं ने विद्वान पंडितों के माध्यम से रुद्राभिषेक कराया. वहीं कुछ भक्तों ने महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की आराधना और विशेष अनुष्ठानों का महत्व माना जाता है.

सोमवारी और नाग पंचमी का दिखा खास संयोग

इस बार सावन की सोमवारी के साथ नाग पंचमी का भी संयोग बना. श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा-अर्चना भी की. कई जगहों पर परंपरा के अनुसार नाग देवता को दूध और लावा अर्पित किया गया.

नाग देवता की पूजा में दिखी लोक आस्था

नाग पंचमी को लेकर कई परिवारों में पारंपरिक तरीके से पूजा की गई. श्रद्धालुओं ने नाग देवता को दूध और लावा अर्पित कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है.

14 साल बाद फिर बनेगा ऐसा संयोग

आचार्य गिरधर तिवारी के अनुसार, सोमवारी और नाग पंचमी का ऐसा संयोग दोबारा करीब 14 वर्षों के बाद आएगा. इसी वजह से इस बार के पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला. हालांकि, ऐसे पंचांग संबंधी दावों की सटीक पुष्टि के लिए संबंधित वर्ष के पंचांग की गणना देखना उचित होगा.

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By नरेद्र प्रसाद सिंह

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