Flood Relief Pawan Singh: बड़हरा प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ का पानी कई इलाकों से धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन बाढ़ की तबाही झेल चुके परिवारों की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं. घरों में पानी घुसने से प्रभावित परिवारों के सामने भोजन, कपड़े और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की समस्या बनी हुई है. इस बीच बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने का सिलसिला जारी है.
इसी क्रम में भोजपुरी के पावर स्टार सह भाजपा के एमएलसी पवन सिंह की टीम रविवार को घांघर गांव पहुंची. टीम के सदस्यों ने बाढ़ प्रभावित जरूरतमंद परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया. राहत सामग्री मिलने पर प्रभावित परिवारों ने टीम के सदस्यों का आभार जताया.
वीडियो कॉल पर पीड़ितों का लिया हालचाल
राहत वितरण के दौरान उस समय माहौल भावुक हो गया, जब पवन सिंह खुद वीडियो कॉल के माध्यम से घांघर गांव के बाढ़ पीड़ितों से जुड़ गये. उन्होंने महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं से बातचीत कर बाढ़ के बाद की स्थिति की जानकारी ली. इस दौरान उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा, “हमारी जनता हमारे लिए भगवान है.”
वीडियो कॉल के दौरान पवन सिंह ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही भोजपुर पहुंचेंगे और बाढ़ प्रभावित लोगों से स्वयं मुलाकात करेंगे. उन्होंने विशेष रूप से माता-बहनों से मिलने की बात कही. उनके इस आश्वासन से ग्रामीणों में उनसे आमने-सामने मिलने की उम्मीद जगी.
टीम के साथ पहुंचे बड़े भाई रानू सिंह
घांघर गांव में राहत सामग्री वितरण के दौरान पवन सिंह के बड़े भाई रानू सिंह, उनके करीबी गुड्डू सिंह समेत टीम के कई सदस्य मौजूद रहे. टीम की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों तक लगातार राहत सामग्री पहुंचाने की बात कही गयी. राहत वितरण के दौरान जरूरतमंद परिवारों से उनकी समस्याओं की जानकारी भी ली गयी.
पानी उतरने के बाद भी ग्रामीणों की मुश्किलें बरकरार
बाढ़ का पानी भले ही अब कई इलाकों से उतर रहा हो, लेकिन बाढ़ से हुए नुकसान का असर अभी ग्रामीणों की जिंदगी में साफ दिखाई दे रहा है. कई परिवारों को भोजन, कपड़े और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की जरूरत है. ऐसे में राहत सामग्री लेकर गांव पहुंच रही टीम प्रभावित परिवारों के लिए मदद का सहारा बन रही है.
अब पवन सिंह के वीडियो कॉल के बाद घांघर समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को उनके भोजपुर आने और उनसे आमने-सामने मुलाकात का इंतजार है. पानी उतर रहा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें और मदद की उम्मीद अभी बाकी है.
