गड़हनी-नोनाडीह मार्ग पर प्रशासन द्वारा चांदी और नोनाडीह के समीप लगाए गए लोहे के बैरियर स्थानीय ग्रामीणों के लिए भारी मुसीबत का कारण बन गए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि इस मार्ग पर यात्री बसों के साथ-साथ स्कूली वाहनों और कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले बड़े ट्रैक्टरों-थ्रेशरों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है.
प्रशासनिक स्तर पर की गई इस नाकेबंदी से मनैनी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि यह बैरियर मूल रूप से अवैध बालू खनन और बालू लदे अनियंत्रित ओवरलोडेड ट्रकों की आवाजाही को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लगाया गया था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था से प्रशासनिक मंशा भले ही जो हो, हकीकत में आम जनता, किसान और छात्र पिस रहे हैं.
किसानों और छात्रों की बढ़ रही परेशानी
खेती-किसानी के मौसम में आवश्यक बड़े कृषि वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुकने से किसानों ने भारी चिंता जाहिर की है. वहीं दूसरी ओर, ग्रामीणों का यह भी बताना है कि बैरियर के कारण स्कूल बसों और सार्वजनिक यात्री बसों का परिचालन ठप होने से आरा जाकर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं की शिक्षा पर बुरा असर पड़ रहा है.
बच्चे समय पर अपनी कक्षाओं और परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पा रहे हैं. क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों का स्पष्ट रूप से मानना है कि बालू के अवैध कारोबार को रोकने के लिए प्रशासन सख्त उपाय जरूर करे, लेकिन इसकी आड़ में आम जनजीवन, बच्चों के भविष्य और कृषि व्यवस्था को ठप कर देना किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है.
एसडीओ पीरो कृष्णकांत उपाध्याय का बयान
आए दिन हो रही गंभीर दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए ही बड़े वाहनों पर रोक लगाई गई है. उन्होंने कहा कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सर्वोपरि है
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