आरा में अतिक्रमणकारियों का बढ़ता दबदबा, तालाब से लेकर सड़क तक कब्जा, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

भोजपुर जिले में अतिक्रमण की समस्या गंभीर हो गई है, जहां तालाबों से लेकर सड़कों तक पर कब्जा हो रहा है. वीर कुंवर सिंह से जुड़े ऐतिहासिक स्थल भी इससे अछूते नहीं हैं. इस स्थिति में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.

Arrah News : भोजपुर जिले में अतिक्रमण की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है. जिला मुख्यालय आरा से लेकर अनुमंडल और ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी जमीन, तालाब, सड़क, गली और सार्वजनिक स्थान अतिक्रमण की चपेट में हैं. हालात यह हैं कि ऐतिहासिक तालाबों का अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है, जबकि कई जगहों पर सड़क और अस्पताल के रास्ते तक पर कब्जा कर लिया गया है. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने को लेकर कोई ठोस और प्रभावी पहल नजर नहीं आ रही है.

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक वीर कुंवर सिंह से जुड़े ऐतिहासिक जगदीशपुर किला परिसर और उनके समय के बनाए गए तालाब भी अतिक्रमण से अछूते नहीं हैं. शहर से लेकर गांव तक अतिक्रमण का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ रही है.

सड़क, तालाब और सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से कब्जा

जिले में अतिक्रमण की समस्या किसी एक जगह तक सीमित नहीं है. कहीं सड़क किनारे दुकानें लगाकर रास्ता घेरा गया है तो कहीं सरकारी जमीन पर निर्माण कर लिया गया है. तालाब, आहर, पोखर और मैदान भी धीरे-धीरे अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहे हैं.

शहर के कई इलाकों में स्थिति ऐसी है कि पैदल चलने तक की जगह नहीं बचती. बाजारों में सड़क पर दुकानें सजने से जाम की समस्या आम हो गई है. प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमणकारियों के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं.

अस्पताल जाने के रास्ते पर भी अतिक्रमण

अतिक्रमण की सबसे चिंताजनक तस्वीर आरा मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सलेमपुर इजरी स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रास्ते पर देखने को मिल रही है. मरीजों के लिए बनाए गए अस्पताल तक पहुंचने वाले रास्ते पर भी कब्जा कर लिया गया है.

ऐसे में गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इतना ही नहीं, आरोप है कि बिना जमीन की सही जांच के प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी निर्माण की अनुमति दे दी गई.

जल संरक्षण की योजनाओं पर भारी पड़ रही लापरवाही

सरकार लगातार जल संरक्षण और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए तालाबों और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने की बात कर रही है. इसके लिए कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के कारण इन योजनाओं का असर जमीन पर नहीं दिख रहा है.

तालाबों के अतिक्रमण से आने वाले समय में जल संकट और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने जल स्रोतों को बचाना बेहद जरूरी है.

आरा शहर के कई ऐतिहासिक तालाब अतिक्रमण की चपेट में

आरा शहर के कई महत्वपूर्ण तालाब धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं.

बिंद टोली तालाब: शहर के बिंद टोली स्थित तालाब कभी तीन एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ था. अब यह सिमटकर करीब एक एकड़ में रह गया है. चारों तरफ से अतिक्रमण के कारण इसका अस्तित्व खतरे में है. आरोप है कि यहां जिलाधिकारी के एक कर्मचारी द्वारा भी भवन निर्माण कर लिया गया है. इसके बावजूद अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई.

डिंस टैंक तालाब: नगर थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक डिंस टैंक तालाब का निर्माण अंग्रेजों के समय हुआ था. कभी दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला यह तालाब अब महज कुछ कट्ठे में सिमट गया है. तालाब भरकर कई जगह निर्माण कर दिया गया है. आम्रपाली मार्केट और नगर थाना भवन निर्माण को लेकर भी तालाब क्षेत्र के उपयोग का मामला सामने आया है.

छठिया तालाब: अनाईठ मौजा में स्थित छठिया तालाब कभी तीन एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला था. छठ पर्व के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग पूजा करते थे, लेकिन शहर विस्तार के साथ धीरे-धीरे इसमें मिट्टी भरकर कब्जा कर लिया गया और अब इसका अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है.

धोबी घाट तालाब: बिहारी मिल से पश्चिमी ओवरब्रिज जाने वाले रास्ते के पास स्थित धोबी घाट तालाब कभी धोबी समाज के लिए महत्वपूर्ण स्थान था. कपड़े धोने के लिए इस्तेमाल होने वाला यह तालाब अब पूरी तरह खत्म हो चुका है.

कलेक्ट्री तालाब: ऐतिहासिक कलेक्ट्री तालाब भी अतिक्रमण से प्रभावित है. अंग्रेजों के समय अश्वारोही पुलिस के घोड़ों के लिए बनाए गए इस तालाब का आकार काफी छोटा हो गया है. इसके चारों ओर निर्माण होने से इसका क्षेत्रफल घट गया है. हालांकि यहां छठ पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

गांधीनगर और जेल के पीछे का तालाब: गांधीनगर मोहल्ले का तालाब भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. वहीं जेल के पीछे चार एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला तालाब अब भवनों में बदल चुका है.

पावरगंज सूर्य मंदिर तालाब: रेलवे पूर्वी गुमटी के पास स्थित यह तालाब कभी तीन एकड़ में फैला था, लेकिन अब सिमटकर डेढ़ से पौने दो एकड़ के आसपास रह गया है. यहां भी लगातार अतिक्रमण जारी है.

सड़क अतिक्रमण भी बना बड़ी समस्या

आरा के शीश महल चौक स्थित सब्जी गोला में सड़क अतिक्रमण की समस्या गंभीर बनी हुई है. पूरे दिन सड़क पर दुकानें लगी रहने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है. बाइक, साइकिल और अन्य वाहनों के निकलने तक की जगह नहीं बचती.

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन प्रशासन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है.

जागरूकता और सख्त कार्रवाई की जरूरत

स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाबों और सार्वजनिक जमीनों को बचाने के लिए केवल अभियान चलाना काफी नहीं है, बल्कि सख्त कार्रवाई भी जरूरी है. लोगों को जल स्रोतों के महत्व के बारे में जागरूक करने की जरूरत है.

प्रशासन को अतिक्रमणकारियों के खिलाफ अभियान चलाकर सरकारी जमीन और तालाबों को मुक्त कराना होगा. यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जल संकट और पर्यावरणीय समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं.


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लेखक के बारे में

Author: Narendra Prasad Sin

Published by: Ragini Sharma

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