Arrah Petrol Pump Irregularities Exposed : आरा जिले में पेट्रोल पंपों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. उपभोक्ताओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाए गए नियम यहां खुलकर नजरअंदाज किए जा रहे हैं. हालत यह है कि कई पेट्रोल पंपों पर मिलावटी तेल, घटतौली और बुनियादी सुविधाओं की कमी से लोग रोजाना परेशान हो रहे हैं. सरकारी आदेशों के बावजूद जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग दिख रही है, जिससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
जिले में कुल 109 पेट्रोल पंप संचालित हैं, लेकिन अधिकतर जगहों पर उपभोक्ताओं को तय मानकों के अनुसार सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. न तो शुद्ध तेल की गारंटी है और न ही सही मात्रा मिलने का भरोसा. इससे वाहन चालकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है.
Petrol Pump : मानकों की खुलेआम अनदेखी
सरकार की ओर से पेट्रोल पंपों पर कई तरह की मुफ्त सुविधाएं देने का निर्देश है, लेकिन अधिकतर पंपों पर ये सुविधाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं. जमीन पर न तो स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था है और न ही शौचालय, एयर कंप्रेशर या बैठने की सुविधा. सुरक्षा के लिहाज से भी स्थिति चिंताजनक है.
कई पेट्रोल पंपों पर सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं, वहीं सुरक्षा गार्ड की भी व्यवस्था नहीं है. ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है.
Bihar consumer Issues Petrol Pump : सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
पेट्रोल पंप जैसे संवेदनशील स्थान पर अग्निशमन यंत्र अनिवार्य होते हैं, लेकिन जिले के कई पंपों पर यह व्यवस्था भी नहीं है. इससे आगजनी की आशंका बनी रहती है. इसके अलावा नो स्मोकिंग और मोबाइल इस्तेमाल पर रोक से जुड़े बोर्ड भी अधिकतर जगहों पर नहीं लगाए गए हैं.
यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग इस ओर गंभीर नहीं दिख रहे हैं.
Arrah News : मिलावटी तेल और घटतौली का खेल
उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत तेल की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर है. कई पंपों पर पेट्रोल में मिलावट की बात सामने आ रही है, जिससे वाहनों की परफॉर्मेंस पर असर पड़ रहा है. वहीं नाप में गड़बड़ी के कारण ग्राहकों को कम तेल मिल रहा है.
इसका सीधा असर वाहन चालकों की जेब और वाहन की माइलेज पर पड़ रहा है. कई लोगों का कहना है कि टंकी फुल कराने के बावजूद गाड़ी जल्दी रिजर्व में चली जाती है, जिससे उन्हें बीच रास्ते परेशानी उठानी पड़ती है.
शिकायत करने की भी नहीं है सुविधा
नियम के अनुसार हर पेट्रोल पंप पर कंप्लेंट बुक उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन यहां ग्राहकों को यह सुविधा भी नहीं दी जा रही है. कई बार मांगने पर भी पंप कर्मचारी कंप्लेंट बुक देने से बचते हैं, जिससे लोग अपनी शिकायत दर्ज नहीं कर पाते.
इसके अलावा इमरजेंसी कॉल की सुविधा और फर्स्ट एड बॉक्स जैसी जरूरी व्यवस्थाएं भी या तो नहीं हैं या नाममात्र की हैं. जहां फर्स्ट एड बॉक्स रखा गया है, वहां उसमें जरूरी दवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं.
जांच के नियम, लेकिन कार्रवाई नहीं
नियमों के अनुसार पेट्रोल पंपों की हर सप्ताह जांच होनी चाहिए, लेकिन प्रशासन, तेल कंपनियां और माप-तौल विभाग इस दिशा में सक्रिय नहीं दिख रहे हैं. जांच के अभाव में पंप संचालकों की मनमानी बढ़ती जा रही है और उपभोक्ता लगातार शोषण का शिकार हो रहे हैं.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक उपभोक्ताओं को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. अगर समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है. फिलहाल जरूरत है नियमित जांच और कड़ी कार्रवाई की, ताकि उपभोक्ताओं को उनका हक मिल सके और व्यवस्था में सुधार हो सके.
