Ganga flood: बड़हरा प्रखंड में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार तीसरे दिन कमी दर्ज की गयी है. सोमवार को सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 54.74 मीटर दर्ज किया गया, जो शाम चार बजे घटकर 54.66 मीटर हो गया. इस तरह दिनभर में करीब आठ सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गयी. हालांकि, जलस्तर में कमी के बावजूद गंगा अब भी खतरे के निशान 53.08 मीटर से 1.58 मीटर यानी 158 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. सुबह गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 1.66 मीटर ऊपर था. जलस्तर घटने से बाढ़ प्रभावित लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन खेतों और ग्रामीण सड़कों पर पानी जमा रहने से परेशानी बनी हुई है.
चार पंचायतों के कई इलाकों में फैला था बाढ़ का पानी
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंचने के कारण बड़हरा प्रखंड की गुंडी, सेमरिया पड़रिया, फरना और बखोरापुर पंचायतों के कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया था. इससे हजारों एकड़ में लगी सब्जी की फसल बर्बाद हो गयी है. करजा गांव सहित तरी बधार और इंग्लिश बधार में लौकी समेत अन्य सब्जियों की खेती को भारी नुकसान पहुंचा है.
इसके अलावा शिवपुर, फरहदा, गजियापुर, लक्ष्मीपुर समेत कई बधारों में धान, मक्का, मसूर और अन्य फसलें भी पानी में डूब गयी हैं. किसानों का कहना है कि बाढ़ के कारण सब्जी की खेती में लगी पूंजी डूब गयी है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है.
कई ग्रामीण सड़कों पर अब भी जमा है पानी
जलस्तर में कमी के बावजूद नेकनामटोला पहुंच पथ, लौहर-बखोरापुर, शिवपुर-फरहदा और दुर्गटोला-गजियापुर समेत कई ग्रामीण सड़कों पर अब भी बाढ़ का पानी जमा है. कई गांवों में आवागमन नाव के सहारे हो रहा है. पानी घटने के बाद ग्रामीणों को जल्द आवागमन सामान्य होने की उम्मीद है.
फसल क्षति का सर्वे और मुआवजे की मांग
किसानों ने प्रशासन से बाढ़ से हुई फसल क्षति का जल्द सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में कमी राहत की खबर है, लेकिन जब तक खेतों और सड़कों से पानी पूरी तरह नहीं निकलता, तब तक बाढ़ की परेशानी बनी रहेगी.
