Arrah Weather News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह) आरा में जून के दूसरे सप्ताह में ही गर्मी ने विकराल रूप ले लिया है. सुबह से ही तेज धूप के कारण धरती तपने लगटी है. जिससे लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया पूरे दिन चिलचिलाती धूप ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया.
40 डिग्री के पार पहुंचा पारा, लू का असर
जिले का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 30 डिग्री रहा. पछुआ हवा के साथ लू चलने से स्थिति और भी गंभीर हो गई. लगभग 8 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी.
बच्चे-बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिल रहा है. लोग जरूरी काम के अलावा घरों से निकलने से बच रहे हैं और सुबह 9 बजे से पहले या शाम 5 बजे के बाद ही बाहर निकलना उचित समझ रहे हैं.
पशु-पक्षियों की हालत भी खराब
गर्मी के कारण तालाब सूखने लगे हैं, जिससे पशुपालकों को काफी परेशानी हो रही है. पशुओं को पानी पिलाना और नहलाना मुश्किल हो गया है. वहीं पक्षी भी पानी के अभाव में भटक रहे हैं, कई पक्षियों की मौत की खबरें भी सामने आ रही हैं.
ठंडे पेय और लस्सी की बढ़ी मांग
भीषण गर्मी के चलते लस्सी, ठंडा पेय और शीतल पेय पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ गई है. शहर में जगह-जगह लस्सी और ठंडे पेय की दुकानें सज गई हैं, जहां सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ उमड़ रही है.
मिट्टी के घड़े और सुराही की बढ़ी बिक्री
गर्मी से राहत पाने के लिए लोग पारंपरिक तरीकों की ओर लौट रहे हैं. बाजार में मिट्टी के घड़े और सुराही की मांग बढ़ गई है. लोग इन्हें स्वास्थ्य के लिए बेहतर और प्राकृतिक ठंडक देने वाला मान रहे हैं.
सत्तू और बेल शरबत का सहारा
गर्मी से बचने के लिए लोग सत्तू और बेल के शरबत का सेवन कर रहे हैं. जगह-जगह इनकी दुकानें लगी हैं, जिससे लोगों को राहत भी मिल रही है और दुकानदारों की आमदनी भी बढ़ रही है.
गमछा-तौलिया बना सहारा
तेज धूप से बचने के लिए लोग सिर पर गमछा या तौलिया रखकर घर से निकल रहे हैं. पारंपरिक तरीके एक बार फिर आम होते नजर आ रहे हैं.
अस्पतालों में बढ़े मरीज
गर्मी के कारण बुखार, लू और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है. मॉडल अस्पताल सहित अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रतिदिन औसतन 10 या उससे अधिक मरीज पहुंच रहे हैं.
