Arrah News: (मिथिलेश्वर प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट) शाहपुर प्रखंड के महत्वपूर्ण रानीसागर–भरौली पथ पर महरजा नदी स्थित क्षतिग्रस्त पुल को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. इस पुल की प्रशासनिक उपेक्षा के कारण स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि इसके ऊपर की कंक्रीट ढलाई पूरी तरह उखड़ चुकी है और अंदर लगी लोहे की सरिया (छड़) बाहर झांकने लगी है. यह पुल इस मार्ग की लाइफलाइन माना जाता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में इस पर से गुजरना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं है.
कई प्रमुख हाइवे और संपर्क मार्गों को जोड़ता है यह रास्ता
यह मार्ग शाहपुर-करनामेपुर सड़क, एनएच-30 तथा आरा-बक्सर फोरलेन एनएच-922 को आपस में जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क पथ माना जाता है. इस वजह से इस जर्जर पुल पर चौबीसों घंटे छोटी-बड़ी गाड़ियों का भारी दबाव रहता है.
पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश कुमार पांडे ने शाहाबाद पथ प्रमंडल (आरा) के अधीक्षण अभियंता को एक लिखित आवेदन सौंपा है. इस आवेदन के माध्यम से उन्होंने पुल पर भारी और ओवरलोडेड वाहनों के परिचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने तथा जनहित में यहाँ अविलंब नए पुल के निर्माण की मांग उठाई है.
20 साल पुराने पुल में आई दरारें, निर्माण की गुणवत्ता पर भी उठाए सवाल
अधीक्षण अभियंता को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि करीब 20 वर्ष पूर्व निर्मित यह पुल रखरखाव के अभाव में अब गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है. पुल के पिलरों और मुख्य संरचना के कई हिस्सों में बड़ी-बड़ी दरारें एवं क्षति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं, जिससे इसकी भार वहन क्षमता पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है. इसके बावजूद प्रतिदिन गिट्टी, बालू और अन्य भारी सामानों से लदे ट्रकों का परिचालन जारी है.
सामाजिक कार्यकर्ता ने मांग की है कि किसी विशेषज्ञ समिति (विभागीय इंजीनियरों की टीम) से पुल की संरचनात्मक जांच कराई जाए. साथ ही, उन्होंने 20 साल पहले हुए इसके निर्माण कार्य में संभावित अनियमितताओं एवं गुणवत्ता संबंधी कमियों की भी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है.
प्रशासन से अविलंब सुरक्षात्मक कदम उठाने की अपील
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भारी वाहनों को इस जर्जर पुल पर आने से नहीं रोका गया, तो पुल कभी भी बीच से टूटकर नदी में समा सकता है, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होना तय है. सामाजिक कार्यकर्ता ने विभाग से आग्रह किया है कि जब तक तकनीकी निरीक्षण पूरा नहीं हो जाता और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक रूट को डायवर्ट किया जाए या भारी वाहनों के प्रवेश पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक लगाई जाए.
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