शाहपुर में मरीज बन गया अस्पताल: 17 वर्षों से बंद पड़ा है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, भवन हो रहा जर्जर

Arrah News: शाहपुर में 17 वर्ष पहले बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आज तक शुरू नहीं हो सका. हैंडओवर नहीं होने से भवन कूड़ेदान और शौचालय बन गया, जबकि रखरखाव के अभाव में जर्जर हो रहा है.

Arrah News: (मिथिलेश्वर प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट) शाहपुर थाना के सामने वर्ष 2007 में बनकर तैयार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का भवन आज खुद इलाज का मोहताज बन गया है. लाखों रुपये की लागत से निर्मित यह अस्पताल पिछले करीब 17 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है, जिसके कारण यहां कभी भी डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई और न ही स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो सकीं.

स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल परिसर अब कूड़ेदान और शौचालय में तब्दील हो चुका है. आसपास के निवासी और फुटपाथी दुकानदार भवन के चारों ओर कचरा फेंकते हैं, जबकि भवन के अंदर खुलेआम शौच किया जाता है. रखरखाव के अभाव में भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. कई जगहों पर सीलिंग टूटकर गिर रही है और भवन के हिस्से क्षतिग्रस्त होने लगे हैं.

100 साल पुरानी डिस्पेंसरी तोड़कर बनाया गया था अस्पताल

जानकारी के अनुसार, अंग्रेजों के जमाने में करीब 1905 में बनी डिस्पेंसरी शाहपुर क्षेत्र के लोगों को लगभग 100 वर्षों तक स्वास्थ्य सेवाएं देती रही. बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुराने भवन को हटाकर नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था. लेकिन विडंबना यह है कि नया अस्पताल बनने के बावजूद आज तक स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं.

2006 में हुआ था शिलान्यास, 2007 में बनकर हुआ तैयार

स्थानीय सूत्रों के अनुसार तत्कालीन विधायक मुन्नी देवी ने 5 दिसंबर 2006 को जिला स्वास्थ्य मद योजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का शिलान्यास किया था. करीब 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह भवन वर्ष 2007 में बनकर तैयार हो गया था. इसके बावजूद अब तक इसे स्वास्थ्य विभाग को औपचारिक रूप से हस्तांतरित नहीं किया गया.

लोगों ने उठाए सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस भवन को क्षेत्र के मरीजों के इलाज के लिए बनाया गया था, वह आज खुद उपेक्षा का शिकार है. अस्पताल के उपयोग में नहीं आने और लगातार बदहाल होती स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी है.

अधिवक्ता अभय कुमार पांडे ने कहा कि तैयार भवन का अब तक स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है. उन्होंने सवाल उठाया कि रखरखाव के अभाव में भवन की हो रही दुर्दशा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा.

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Published by: Nikhil Anurag

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